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मैं भाग्य हूं: क्षमता अनुसार ही चुनें अपना काम

मैं भाग्य हूं: क्षमता अनुसार ही चुनें अपना काम

कर्म ही भाग्य का निर्माण करते हैं. कर्मों के अनुसार ही भाग्य का निर्धारण होता है. कर्मों के पलायन से ही दुर्भाग्य की शुरुआत होती है. इसके लिए सुनिए एक कहानी. जिस तरह से हमारे हाथों की सभी उगलियां एक समान नहीं होती, जैसे आपका हर एक दिन एक सामान नहीं होता, ठीक वैसे ही हर एक इंसान भी एक समान नहीं हो सकता है पर फिर भी इस दुनिया में मनुष्य दूसरों से मिली शक्तियों पर क्यों इतराता है. ऐसे में वो मनुष्य जो दूसरों की उपलब्धियों पर आंसू बहाते हैं, उनके लिए आज हम लेकर आएं है, एक खास कहानी. देखिए मैं भाग्य हूं. 

Karma is the real architect of progress. Without Karma no one can get success. When a person leaves his work, struggle start with that second. The way the fingers of our hands are not the same, Like your every single day is not the same, Just like everybody can not even be the same. Yet why does man in this world show power over others? In such a case, the person who sheds tears on the achievements of others, we have brought for them today, a special story.Watch Mai Bhagya Hoon.

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