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क्रांतिकारी बहुत क्रांतिकारी: बकरीद के दिन अल्लाह को कितनी प्यारी है कुर्बानी!

क्या आज के जमाने में धर्म के नाम पर जानवरों का कत्ल जायज है...मुस्लिमों का त्योहार ईद करीब है और ऐसे वक्त में RSS से जुड़े राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने अपील की है मुसलमान ईद पर जानवरों की कुर्बानी न दें... इसे क्या माना जाए, सवाल बेहद पेंचीदा है... एक तरफ इंसानी सभ्यता 21वीं सदी में तरक्की के हाइवे पर दौड़ रही है फिर भी हम धर्म के नाम पर सदियों पुरानी उन्हीं रूढियों और प्रथाओं में जकड़े हैं... दूसरी तरफ सवाल ये भी है कि रोजाना पूरी दुनिया में खान-पान के लिए हजारों जानवर तो काटे ही जा रहे हैं...उससे किसी को कोई आपत्ति नहीं है...तो फिर किसी एक दिन किसी एक मौके पर जिससे लोगों की आस्था जुड़ी हो, इसे गलत कैसे माना जा सकता है...एक सवाल और है, क्या राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की ये अपील किसी और योजना का हिस्सा है?

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