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कालजयी और मध्यकालीन साहित्य में बहुमूल्य योगदान हेतु साहित्य अकादेमी के भाषा सम्मान 2019-20 के विजेता हैं...

साहित्य अकादेमी ने वर्ष 2019 तथा वर्ष 2020 के लिए कालजयी और मध्यकालीन साहित्य में बहुमूल्य योगदान हेतु चार लेखकों, विद्वानों को साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान पुरस्कार देने की घोषणा की है

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साहित्य अकादेमी
साहित्य अकादेमी

नई दिल्लीः साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर कंबार की अध्यक्षता में रवीन्द्र भवन में आयोजित अकादेमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में वर्ष 2019 के लिए उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों से तथा वर्ष 2020 के लिए पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों से कालजयी और मध्यकालीन साहित्य में बहुमूल्य योगदान हेतु चार लेखकों, विद्वानों को साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान पुरस्कार हेतु अनुमोदित किया गया.
इन भाषा सम्मान से सम्मानित विद्वानों को साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष द्वारा बाद में आयोजित एक विशेष समारोह में पुरस्कार के रूप में 1,00,000/- रुपये की राशि, उत्कीर्ण ताम्रफलक और प्रशस्ति- पत्र प्रदान किए जाएंगे.
भाषा सम्मान विजेताओं के संक्षिप्त परिचय और निर्णायक समितियों के सदस्यों के नाम, जिनके निर्णय पर भाषा सम्मान की घोषणा की गई थी, निम्नलिखित हैं:
कालजयी और मध्यकालीन साहित्य
उत्तरी क्षेत्र (2019)
प्रो. दयानंद भार्गव प्रख्यात शिक्षाविद् और शोधकर्ता हैं. आपने संस्कृत में पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की और आप व्याख्याता, प्राचार्य, प्रोफे़सर, विभागाध्यक्ष, डीन तथा प्रोफे़सर एमेरिटस जैसे विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं. संस्कृत और अंग्रेज़ी में आपकी लगभग ढाई दर्ज़न शोध पुस्तकें प्रकाशित हैं. इसके अलावा आपके दो सौ शोध आलेख प्रकाशित हैं. आप राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर, शिक्षा विभाग, राजस्थान के पुरस्कार तथा आचार्य हस्तीमल पुरस्कार, प्रेक्षा पुरस्कार आदि अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं.
निर्णायक सदस्य: प्रो. सत्यनारायण चक्रवर्ती, प्रो. देवनारायण झा और डॉ. रामबचन राय.
दक्षिणी क्षेत्र (2019)
प्रो. ए. दक्षिणामूर्ति गहन शोधकर्ता, उत्कृष्ट वैयाकरण और कालजयी तमिऴ़ साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान हैं. आपने 20 तमिऴ़ कालजयी कृतियों का अनुवाद किया है. आप प्राचीन कालजयी तमिऴ़़़ साहित्यिक कृतियों का अधिकतम संख्या में अनुवाद करने वाले प्रथम और एकमात्र लेखक हैं. आपने तमिऴ़ रचनाओं के अनुवादों एवं तमिऴ़ कालजयी ग्रंथों तथा विद्वत्तापूर्ण तमिऴ़ पुस्तकों, लेखों, प्राप्त निष्कर्षों और शोध पत्रों द्वारा प्राचीन और वर्तमान तमिऴ़ समाज के बीच के संबंधों हेतु सेतु निर्माण करने का प्रयास किया है.
निर्णायक सदस्य: डॉ. टी.एस. कृष्णन, प्रो. सी. नागन्ना और डॉ. थुम्मापुडी कोटेश्वर राव.
पूर्वी क्षेत्र (2020)
प्रो. सत्येंद्र नारायण गोस्वामी ने कोलकाता विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की और आपने नागमीज़ इट्स स्टेटस एंड पोज़िशन इन नागालैंड, द सोसायटी एंड कल्चर रिफ़्लेक्टेड इन द रामायणा आॅफ़ माधव कंदली, हिस्ट्री एंड प्रि-हिस्ट्री ऑफ़ दि असमीज़ प्रोज़ लिटरेचर और द बोरो एंड गारो लैंग्वेज-ए कंपेरिटिव स्टडीज़ आदि विभिन्न विषयों पर पोस्ट-डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है. आप इंदिरा गाँधी मेमोरियल फैलोशिप, असम सरकार के साहित्यिक पुरस्कार आदि अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं. आप डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफे़सर रह चुके हैं.
निर्णायक सदस्यः प्रो. प्रदीप ज्योति महंत, डॉ. बसंत कुमार पांडा और डॉ. जयिता दत्ता.
पश्चिमी क्षेत्र (2020)
डॉ. मोहम्मद आज़म वरिष्ठ विद्वान हैं. आपने अब तक कालजयी और मध्यकालीन साहित्य के क्षेत्र में कार्य किया है. आपको हिंदी, मराठी, अरबी, फ़ारसी, उर्दू, कन्नड और अंग्रेज़ी भाषाओं का भी ज्ञान है. आपने मेडिएवल लिटरेचर कदमाराव नामक महत्त्वपूर्ण और उल्लेखनीय महाकाव्य का लेखन किया है. ‘सूफ़ीवाद और तुलनात्मक धर्मशास्त्र’ पर आपकी 1650 पृष्ठों की एक वृहद् कृति प्रकाशित है, जिसमें आपने वेदों, उपनिषदों, क़ुरान, हदीस, संत काव्यों का उल्लेख किया है. आपके लेख प्रमुख पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहे हैं.
निर्णायक सदस्यः डॉ. सतीश बडवे, श्री प्रसाद ब्रह्मभट्ट और प्रो. (डॉ.) एस.एम. ताडकोडकर.

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