Bhasad bhasad all around
रगड़ दी साली जिंदगी की sound
कभी ambition तो कभी esteem
बजा दी अपनी individuality की बीन
Package चाहिए जॉब में मोटा
चाहे skills-set कितना हो छोटा
बचपन जाएगा , जवानी छाएगी
मां -बाप की डांट -फटकार पीछे ज़रूर आएगी
लाइफ में क्या चाहिए कर लिया इरादा
सपनों की एक लिस्ट बना ली – न कम न ज्यादा
Practical life ने निकाल दिया सारा juice
हम कितने लाचार हैं ये हो गया महसूस
हम रोये बिलख बिलख के मन में लेकर आस
पर zindgi ki bhasad कोई ना कर सका पास.
यह कविता दीपिका शर्मा ने लिखी है. 