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बुक रिव्यू: स्ट्रेसबस्टर साबित होगी यह 'दिलजली' शायरी!

पाठकों को क्या कमाल का आमंत्रण देते हैं गीतराज! हालांकि एकाध शेर से यह भ्रम होता है कि उन्होंने अपनी ओर से ग़ज़लें लिखने का गंभीर प्रयास किया होगा, जो बाद में किसी दैवीय प्रेरणा से चमत्कृत कर देने वाले साहित्यिक टुकड़े में परिवर्तित हो गया. लेकिन अब जो भी है, मजेदार है. इसे पढ़िये, दोस्तों को पढ़ाइए और मस्त हो जाइए.

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Geetraj ki shayari
Geetraj ki shayari

किताब: गीतराज की शायरी
कवि/शायर:
मूलचंद गोयल 'गीतराज'
प्रकाशक:
काव्य प्रकाशन

चुम्मा जो दिया उन्होंने मेरे गाल पर
जल उठे दिल दुश्मनों के मेरे खुशहाल पर

ऑटो और ट्रकों के पीछे लिखी जाने वाली शायरी हमेशा फुटकर में ही क्यों पढ़ने को मिलती है? इसका कोई ग्रंथ-सी मोटाई वाला कविता संग्रह उपलब्ध क्यों नहीं है? हाईवे पर दौड़ते ट्रकों की पीठों पर कुछ खोजते हुए यह सदाशयी सवाल अकसर मेरे ज़ेहन में आया करता था. समकालीन 'ट्रक-साहित्य' पर एक अदद किताब की नामौजूदगी मुझे हमेशा खला करती थी. उस मौलिक आनंद की प्राप्ति के लिए मैं हाईवे-दर-हाईवे भटकते रहने से बचना चाहता था.

शुक्रिया ‘गीतराज’ कि उन्होंने अपने शायरी-संग्रह से मेरी इस व्यक्तिगत इच्छा को जाने-अनजाने कुछ हद तक पूरी करने का नेक काम कर दिया.

चख चख के दे रहा हूं आपको ये प्यारे शेर
ग्रहण इन्हें करने में कीजिए ना अधिक देर

पाठकों को क्या कमाल का आमंत्रण देते हैं गीतराज! हालांकि एकाध शेर से यह भ्रम होता है कि उन्होंने अपनी ओर से ग़ज़लें लिखने का गंभीर प्रयास किया होगा, जो बाद में किसी दैवीय प्रेरणा से चमत्कृत कर देने वाले साहित्यिक टुकड़े में परिवर्तित हो गया. लेकिन अब जो भी है, मजेदार है. इसे पढ़िये, दोस्तों को पढ़ाइए और मस्त हो जाइए.

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पाठकों की सुविधा का ध्यान रखते हुए किताब में यह व्यवस्था भी की गई है कि उसके रसोस्वादन के दौरान जेहन पर ज्यादा जोर न आए और आप सभी इंद्रियों का इस्तेमाल करते हुए खुलकर, खिलकर और अट्टहास करते हुए हंस सकें. 50 रुपये में इससे बेहतर ‘स्ट्रेसबस्टर’ किताब नहीं मिलेगी. लोग स्ट्रेस भगाने के तरीके लिखकर समझाते हैं, यह किताब प्रैक्टिकल करके दिखाती है. करना बस इतना है कि किताब को चौबीसों घंटे अपने पास रखना है और बीच-बीच में इसका एकाध हिस्सा आस-पास बैठे बंधुओं, दोस्तों, सहकर्मियों को सुना मारना है.

याद रखें कि यह निश्छल भावुकता में लिखी गई किताब है. कई जगहों पर शब्दों के विशिष्ट प्रयोग से शायर के कोमल हृदय होने का पता मिलता है. एक उदाहरण देखें,

उई मैं लुट गई प्यार में, उई मैं लुट गई प्यार में
हुआ नहीं कोई भी मेरा, इस ज़ालिम संसार में

घर में भी मैं बुरी बनी, बाहर भी बदनाम हुई
सभी तरफ से मिली रुसवाई, प्यार किया बेकार में

पढ़कर लगता है कि ‘रासायनिक’ महफिलों में पढ़े जाने का सबसे पहला हक इन्हीं पंक्तियों का ही होगा. जैसे दुनिया-जहां की ‘वाह-वाह’ और ‘मुक़र्रर इरशाद’ इन्हीं के हिस्से आनी हो. क्या ग़ालिब-वालिब किया करते हैं आप. उन्हें दिल में बसाकर रखिए. कभी-कभी पढ़ लिया कीजिए. पर यारों की महफिल के असल शायर तो गुरु गीतराज हैं.

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जिन लोगों को लाफ्टर थैरेपी ढकोसला लगती रही होगी, उन्हें गीतराज की गजलों की तलब लग जाएगी और इसे सुनने वे बार-बार आपके पास आएंगे. प्रेम में 'अपेक्षा और उपेक्षा' के कॉन्सेप्ट का उत्कृष्ट संयोजन इस शेर में दिखता है, कि

मांगते ही रहते हो दिल चुम्मा प्यार
कभी हमें कुछ दिया भी करो यार

मर जाते हम कभी के ‘यदि’ पता होता
वे शव से लिपट रोएंगे मरने के बाद

जैसा कि आप देख पा रहे हैं कि उपरोक्त शेर में ‘यदि’ के इस्तेमाल ने क़हर बरपा दिया है. ऐसे ही कई साहसिक प्रयोग गीतराज ने किए हैं, जिनका रचनाधर्मी और सृजनात्मक लोगों को नोटिस लेना चाहिए. पुराने आशिकों और पीड़ा में आनंद खोजने वालों को यह शायरी लहालोट कर देगी. यहां मर्म देखिए,

बताया गया यह कि आग लग गई
पूछा कहां तो हाथ सीने पर रख दिया

या कि जब वह कहते हैं,

अगर इजाजत दे दो, तुम को जाम बना लूं
कब से प्यासा हूं मैं अपनी प्यास बुझा लूं
परियों के किस्से मैं बचपन में सुनता था
आज एक परी को सीने से मैं लगा लूं

गीतराज ने भावी प्रेमिका के सौंदर्य के अभूतपूर्व ब्यौरे दिए हैं. इनमें वे नाज़ुक अदाएं भी हैं जिन पर वह दीवाना बनाने का इल्ज़ाम मढ़ते हैं. कई ऐसे उदाहरण है जहां गीतराज का विशिष्ट हिंदी प्रेम उमड़-उमड़ कर दिखता है. वह ग़ज़लों में ‘लाभ’, ‘भावना’ और ‘क्षण’ जैसे हिंदी के शब्दों को जिस बेफिक्री से समाहित करते हैं, वैसा विरले साहित्यकार ही कर पाए हैं.

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आरज़ू उनकी तू कर ना ‘गीतराज’
संभव नहीं हो पाता हाथ चांद का आना

या
नज़र से उन्होंने जो नज़र को मिला दिया
आनंद की पराकाष्ठा को मैंने पा लिया

या
उनकी मेहंदी ने बड़ा ही ग़ज़ब ढाया
उनकी सुंदरता और हमारी तमन्ना को बढ़ाया

क़ाबिल-ए-ज़िक्र यहां यह भी है कि ‘गीतराज की शायरी’ उन चुनिंदा किताबों में से एक है जिसमें ‘जन्नत’ और ‘जाम’ के नीचे भी नुक़्ता लगा हुआ आपको दिख जाएगा. इससे शायर के उर्दू से भी बराबर मुहब्बत करने का पता चलता है.

गीतराज की शायरी में संवेदना के सूक्ष्म तारों से खिलवाड़ करने का माद्दा है. यह गर्मी और दफ्तर के बोझ से थके-मुंदे चेहरे को भी गुलाबीपन लौटा सकती है. शायरी में जो शरारत है, या कि जो मौकापरस्ती है, उसका पता भी गीतराज जहां-तहां देते हैं. मसलन, जब वह कहते हैं,

लिपट जाते हैं वे बिजली के कड़क जाने से
दूर हो जाते हैं गिले इसी बहाने से

या यह शेर,

हाथ सेंक लो कहते हुए लोग नज़र आते हैं
घर जले या दिल फायदा मौके का उठाते हैं

यह किताब विशुद्ध रूप से ‘इश्किया शायरी’ है. लेकिन इसके बावजूद गीतराज अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं भूले हैं. व्यवस्था को कोसने के लिए उन्होंने बेहद प्रचलित शब्दों का चुनाव किया है. वह लिखते हैं.

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रोज़ हो रहा है जनता का बलात्कार
लिप्त हैं इसमें खुदग़र्जी महंगाई भ्रष्टाचार

साथ ही राजनीति में ‘आम’ के उभार को भी वह संकेतों में ही रेखांकित कर देते हैं.

जलवा यूं सरेआम दिखाया न कीजिए
आम इंसान, मयक़श, मयक़े सभी जाएंगे बहक

क्यों पढ़ें
अगर महीनों से हंसे नहीं हैं. गर्मी और उमस से चित्त बैठता-सा जाता है. दोस्त सब नौकरी के सिलसिले में व्यस्त हैं और गुदगुदाने के साधनों के अभाव से जूझ रहे हैं, तो जरूर पढ़ें. महफिलों की रंगत बढ़ाने में यह किताब क़यामतख़ेज़ साबित हो सकती है. हां और एक बात, आपके जानने वालों में से किसी ने ऑटो खरीदा है या किसी का ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय है तो उन्हें गिफ्ट कर दें. ट्रकों को भी अब ‘लिखती हूं खून से स्याही न समझना’ से आगे बढ़ने की जरूरत है. यह मल्टी-पर्पज शायरी है. आपके पास वक्त हो तो गहराई से समझिए, मर्म तक पहुंचिए और शायर का उसके दर्द में साथ दीजिए. वरना पढ़िए और खीं-खीं करते हुए आगे बढ़ जाइए.

क्यों न पढ़ें
शायरी को लेकर बहुत शुद्धतावादी रवैया रखते हों तो समझ लीजिए कि गीतराज का प्रसाद पाने की दिव्यदृष्टि आपके पास नहीं ही होगी. साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं. मुमकिन है कि उनके भावुक शेर पढ़कर आपका बीपी बढ़ जाए और रुखसार गुलकंद के माफिक लाल हो उठें. हालांकि ऐसा हुआ तो भी दोष आपका ही है. बंदे ने लिखा है, पढ़कर ईमानदारी से अपना मनोरंजन कीजिए. उनके लिखे हुए का यही सम्मान काफी होगा. क्योंकि किताब के कवर पेज पर भी यही लिखा है, 'भर लो दिल में उमंग, गीतराज की शायरी के संग.'

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