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ख़ानाबदोशियाँ पढ़ आप भी मान लेंगे कि यात्राएं केवल मौज-मस्ती के लिए नहीं होतीं

ट्रॉम्सो के आसपास का एरिया झील और झरनों से भरपूर है. इसे आर्टिक का गेट-वे कहा जाता है. हमने मॉडर्न फिश फॉर्म्स देखे.... एक तरफ बर्फ की खूबसूरत वादियां और दूसरी तरफ सुन्दर-सुन्दर घर बने हुए थे.

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'ख़ानाबदोशियां: यारों संग तफ़रीह', लोकार्पण और नॉर्वे में मस्ती 'ख़ानाबदोशियां: यारों संग तफ़रीह', लोकार्पण और नॉर्वे में मस्ती

यारों संग यात्राएं केवल मौज-मस्ती और तफ़रीह के लिए नहीं होतीं. इस बात को पंकज भार्गव की 'ख़ानाबदोशियां-यारों संग तफरीह' को पढ़कर सहजता से समझा जा सकता है.  
देश-विदेश की यात्राओं पर दुनियाभर की भाषाओं में लिखना सदियों से लोकप्रिय रहा है. हिंदी साहित्य में कई लेखकों ने अपने-अपने यात्रा वृतांत और संस्मरण लिखे. घुमक्कड़ प्रवृत्ति वाले साहित्यकारों ने यात्राओं के अनुभव, भावनाएं और अपना नज़रियां शब्दों में व्यक्त कर अमर कृतियां रची हैं. 
राहुल सांकृत्यायन, 'अज्ञेय',  फ़णीश्वरनाथ रेणु, मोहन राकेश, निर्मल वर्मा और मंगलेश डबराल जैसे नामी लेखकों के यात्रा वृतांत और संस्मरण बेहत चर्चित हैं. अब इस फेहरिस्त में पंकज भार्गव का नाम भी शामिल हो गया है. पंकज ने एक ऐसा यात्रा वृतांत लिखा है, जो साहित्य की कसौटी पर खरा उतरता है. 
टीवी न्यूज़ की दुनिया में पंकज भार्गव की पहचान एक सफल जाने-माने न्यूज़ एंकर के तौर पर रही है. घुमक्कड़ प्रवृति के पंकज भार्गव का बचपन हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों के बीच शिमला में बीता. पेशे से पत्रकार पंकज ने काम के सिलसिले में देश के कोने-कोने की यात्राएं की. लेकिन विदेश यात्रा पर जाना, उनका एक सपना था. उनकी सपनों की यात्रा के हमसफर बने करीबी मित्र साजिद इमाम और संजीव पालीवाल. 
पंकज लिखते हैं कि 'तय यह हुआ कि हम लोग ऐसी जगह जायेंगे, जो सपनों में दिखती है. जहां परियां रहती हैं. जहां. फिज़ां में संगीत गूंजता है. जहां एक तरफ समन्दर की गहराईयां हैं और दूसरी तरफ सफेद चादर से ढकी हुई जमीन भी.' 
पंकज और उनके मित्रों ने नॉर्वे को अपने यात्रा के लिए चुना. इस यात्रा से जुड़े अनुभव, यादगार पल और स्थानों का खूबसूरत वर्णन पंकज भार्गव ने अपनी पुस्तक में किया है. वे अपनी यात्रा को लेकर निश्चित दृष्टिकोण के साथ नॉर्वे के दर्शनीय स्थानों और निवासियों का वर्णन खूबसूरती से करते हैं. कई बार पाठकों को लगेगा कि वे स्वयं की आंखों से नॉर्वे का शहर ट्रॉम्सो को देख रहे हैं. 
यात्रा वृतांत, साहित्य की वह विधा है जिसमें लेखक किसी स्थान के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और वहां के निवासियों का चित्रण करता है. पंकज भार्गव ने अपने यात्रा वृतांत में अपनी विदेश यात्रा को  एक यायावर के तौर पर अनुभव और यादों की विविधता के साथ परोसा है.  
पंकज ट्रॉम्सो का वर्णन करते हुए लिखते हैं- "खैर साहब! सफेद बर्फ की चादर पर बस दौड़ी चली जा रही थी. अचानक बस रुक गयी. पता चला बस के सेंसर में कुछ खराबी है.... बर्फ के ऊपर चलते-चलते हम समंदर के किनारे पहुंचे. ऊपर से बर्फ गिरने लगी थी." 
यूं तो ये संस्मरण नॉर्वे की यात्रा पर आधारित है लेकिन बीच-बीच में पंकज शिमला का जिक्र करना नहीं छोड़ते. वे पाठकों को अपनी यादों के जरिए शिमला की वादियों में भी ले चलते हैं. उनके शब्दों में "आपको इस शहर में कई ऐसे मोड़ मिल जाएंगे जो बरबस लंदन की याद दिला जायेंगे... इसीलिए आज भी शिमला ख़ासतौर पर ब्रिटेन के टूरिस्ट की भारत में पहली पसंद है...." 
शिमला की बात करते हुए वे वापस नॉर्वे के शहर ट्रॉम्सो पर लौट आते हैं. "ट्रॉम्सो के आसपास का एरिया झील और झरनों से भरपूर है. इसे आर्टिक का गेट-वे कहा जाता है. हमने मॉडर्न फिश फॉर्म्स देखे.... एक तरफ बर्फ की खूबसूरत वादियां और दूसरी तरफ सुन्दर-सुन्दर घर बने हुए थे. हम लोग रेंडियर पार्क पहुंचे, जहां एक बेहद खूबसूरत सामी महिला ने हमारा स्वागत किया." 
अपने इस यात्रा वृतांत में पंकज नॉर्वे की यात्रा के सभी बिंदुओं को ऊर्जा भाव से देखने का प्रयास करते हैं. वे पाठकों के मन में नॉर्वे के प्रति सौंदर्य का बोध कराते हुए कौतूहल भी जगाते हैं. वे और उनके मित्र ट्रॉम्सो के बाद नॉर्वे के दूसरे शहर ओस्लो की भी यात्रा पर निकलते हैं. 
अपने मित्रों के साथ घुमक्कड़ पंकज, नॉर्व और उसके शहरों के इतिहास पर तो नज़र डालते चलते ही हैं, वहां के भूगोल और जनजीवन, खानपान का जिक्र करना नहीं भूलते. वे वहां की अर्थव्यवस्था से भी पाठकों को रुबरू कराते हैं. "पहले नॉर्व की पूरी अर्थव्यवस्था मछली पकड़ने के व्यवसाय पर टिकी थी, लेकिन आज टूरिज्म भी नॉर्वे की इकोनोमी का मुख्य हिस्सा है." 
पंकज भार्गव की पहली किताब 'ख़ानाबदोशियाँ: यारों संग तफ़रीह' वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हुई है. नई दिल्ली की रॉयल नॉर्वेजियन एम्बेसी में  जब इस पुस्तक का लोकार्पण हुआ तो भारत में नॉर्वे के राजदूत हंस याकोब फ्रीडनलुंद ने कहा, "मुझे यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि नॉर्वे के बारे में पहली बार यात्रा-वृत्तान्त की कोई पुस्तक हिन्दी में लिखी गयी है. आशा है कि इस पुस्तक के माध्यम से नॉर्वे एक मित्रता और आतिथ्य भाव रखने वाले राष्ट्र के रूप में और अधिक जाना जायेगा."
वाणी प्रकाशन ग्रुप के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी का कहना था, "मेरे विचार से ख़ानाबदोशियाँ वो हल्की-हल्की प्राकृतिक सुगंध का झोका है जो जीवन स्वप्न को झकझोरता है. रंगकर्मी व लेखिका रमा पाण्डेय के शब्द थे, "ख़ानाबदोशियाँ एक मीठी सी किताब है. ऐसी मीठी किताब जो वज़न में भी हल्की हो और आपको तनाव से मुक्त करती हो.
नॉर्व यात्रा को वृत्तान्त शैली में पिरोकर पंकज भार्गव ने 'ख़ानाबदोशियां: यारों संग तफ़रीह' के रूप में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है. मेरी सलाह है कि जो नॉर्व की यात्रा पर जाना चाहते हैं और जो बिना यात्रा पर जाए नॉर्वे को महसूस करना चाहते हैं दोनों ही तरह के पाठकों को इस यात्रा-वृतांत को जरूर पढ़ना चाहिए. 
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पुस्तकः ख़ानाबदोशियाँ: यारों संग तफ़रीह 
लेखक: पंकज भार्गव 
विधाः यात्रा वृतांत 
भाषाः हिंदी  
प्रकाशक: वाणी प्रकाशन 
पृष्ठ संख्याः 96 
मूल्यः 199 रुपए

 

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