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रकुल प्रीत सिंह ने 10 साल से नहीं खाई रोटी... जानें गेहूं ना खाने से शरीर पर क्या होगा असर

Rakul preet singh Fitness Tip: बॉलीवुड एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया कि वो पिछले 10 साल से गेहूं नहीं खा रही हैं और इसकी वजह से उन्होंने अपनी हेल्थ में कई जबरदस्त बदलाव महसूस किए हैं. क्या आपने सोचा है कि गेहूं ना खाना क्या वाकई फायदेमंद है, इस खबर में हम आपको यही जवाब दे रहे हैं.

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रोटी ना खाने से शरीर में क्या बदलाव आएंगे (Photo: ITG)
रोटी ना खाने से शरीर में क्या बदलाव आएंगे (Photo: ITG)

Rakul preet singh Fitness Tip: बॉलीवुड एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह अपनी एक्टिंग, सुंदरता और मासूमियत के साथ ही अपनी परफेक्ट बॉडी के लिए भी जानी जाती हैं. वो काफी फिट हैं जिसके लिए वो मेहनत भी खूब करती हैं. 34 साल की रकुल प्रीत सिंह ने हाल ही में बताया कि वो गेहूं की रोटी नहीं खाती हैं और इसकी जगह वो मोटे अनाज का सेवन करती हैं.

क्यों नहीं खाती आटे की रोटी

रकुल ने 'खाने में क्या है' यूट्यूब चैनल के साथ बातचीत में कहा, 'दाल, रोटी, सब्जी हर उत्तर भारतीय का मुख्य भोजन है. आप ज्वार की रोटी खा सकते हैं. मैं पिछले 10 सालों से ज्वार की रोटी खा रही हूं. बचपन में मैं आटे की रोटी खा लेती थी. ज्वार भी खाती थे. लेकिन पिछले 10 सालों में मैं या तो ज्वार या रागी खा रही हूं. दोनों में से कोई एक खा रही हूं.'

'थैंक गॉड' एक्ट्रेस ने आगे कहा, 'कभी-कभी आप दूसरे खाने की चीजें खा सकते हैं लेकिन घर पर जब आप खाते हैं तो कम से कम ये स्मार्ट चॉइस हो सकती हैं. आपकी दाल, सब्जियां या चिकन वही रहता है लेकिन आटा बदल जाता है. आपको फर्क दिखेगा. गट आपके शरीर का दूसरा दिमाग है.'

गेहूं के बजाय ज्वार-रागी से आपके शरीर पर क्या असर होता है

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अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्स्प्रेस' के साथ बातचीत में कंसल्टेंट डाइटिशियन गरिमा गोयल ने कहा, 'गेहूं को ज्वार या रागी जैसे मिलेट्स के साथ रिप्लेस करना वो भी 10 साल जैसे लंबे पीरियड तक... इससे शरीर में कई बदलाव आ सकते हैं.'

उन्होंने बताया कि ज्वार और रागी दोनों ही नैचुरली ग्लूटेन-फ्री होते हैं जिससे ये पचाने में आसान होते हैं और ग्लूटेन इनटॉलरेंस वाले लोगों के लिए फायदेमंद होते हैं. ये फाइबर से भी भरपूर होते हैं, जो पेट भरने में मदद करता है, ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है और हेल्दी गट फंक्शन को बढ़ावा देते हैं. समय के साथ यह मोटापा, डायबिटीज और कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं. 

मिलेट्स से मिलेंगे ढेरों लाभ

पोषक तत्वों के बारे में गरिमा गोयल ने बताया कि ज्वार कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन देता है जबकि रागी विशेष रूप से कैल्शियम, आयरन और जरूरी अमीनो एसिड से भरपूर होता है. इसे रेगुलर खाने से हड्डियों की मजबूती बनी रहती है, हीमोग्लोबिन का लेवल ठीक रहता है और लगातार एनर्जी मिलती है. अगर डाइट में कई चीजें हैं और वो बैलेंस्ड है तो गेहूं छोड़ना नुकसानदायक नहीं है. बोरियत से बचने और कई तरह के पोषक तत्व पाने के लिए आप मिलेट्स को चावल, ओट्स या जौ जैसे दूसरे साबुत अनाजों के साथ बदल-बदल कर खाया जा सकता है.

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रागी और ज्वार सेहत का हथियार

कनिका मल्होत्रा, जो एक कंसल्टेंट डाइटिशियन और डायबिटीज एजुकेटर हैं, उन्होंने कहा कि ये दिखने में साधारण लगने वाले मिलेट्स सेहत के खजाने हैं जो साइंटिफिक तौर पर लाइसिन और मेथिओनिन जैसे अमीनो एसिड से भरपूर होते हैं जो गेहूं में लगभग बिल्कुल नहीं होते.

कनिका मल्होत्रा ​​ने कहा, लाइसिन खासकर टिशू की मरम्मत, इम्यून सिस्टम की मजबूती और दिमागी फुर्ती के लिए जरूरी है. एक और मजेदार बात यह है कि रागी कैल्शियम का इतना पावरफुल नेचुरल सोर्स है कि ग्राम के हिसाब से यह दूध को टक्कर देता है जो एक अनाज के लिए अनएक्सपेक्टेड है. इसकी यह खासियत इसे उन लोगों के लिए एक सीक्रेट हथियार बनाती है जिन्हें आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी या कमजोर हड्डियों का खतरा हो सकता है.

इसी तरह ज्वार सिर्फ फाइबर से भरपूर नहीं है. यह कॉपर से भी भरपूर है जो हेल्दी रेड ब्लड सेल्स और आयरन लेवल को बनाए रखने के लिए जरूरी मिनरल है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन्स छिपे होते हैं जो त्वचा को चमकदार बना सकते हैं और कोलेजन को भी सपोर्ट कर सकते हैं जो त्वचा को युवा रखने में मदद करता है.

जब इन चीजों को एक्टिव लाइफस्टाइल के साथ मिलाया जाता है तो इस तरह की डाइट बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ, बेहतर डाइजेशन और लंबे समय तक दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होती है.

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