गर्मियों में सॉफ्ट ड्रिंक और जूस पीने की आदत आम हो जाती है, क्योंकि शरीर को ठंडक और ताजगी की जरूरत होती है. इसके कारण इनकी डिमांड भी पिछले कुछ सालों में काफी अधिक बढ़ गई है. लेकिन क्या आप जानते हैं इन्हें पीने से बचना चाहिए. हाल ही में हुई एक स्टडी से पता चला है कि दोनों ही आपके ब्लड शुगर को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं. रिसर्च में फलों के रस सहित मीठे पेय पदार्थों को पीने और टाइप 2 डायबिटीज होने के जोखिम के बीच एक मजबूत संबंध पाया. अगर आप नियमित रूप से सोडा, फलों का रस, एनर्जी या स्पोर्ट्स ड्रिंक पीते हैं, तो शायद आपको इस पर सोचने की जरूरत है.
क्या कहती है स्टडी?
एडवांसेज इन न्यूट्रीशन नामक मैग्जीन में पब्लिश इस रिसर्च में विभिन्न महाद्वीपों के 5 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था. अमेरिका में ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, ये ड्रिंक्स टाइप 2 मधुमेह (T2D) के आपके जोखिम को पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ा सकते हैं. टीम ने पाया कि पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे कि साबुत फल, डेयरी उत्पाद या साबुत अनाज के माध्यम से ग्रहण की गई शुगर शरीर में अलग तरह से व्यवहार करती है और लिवर पर गलत प्रभाव नहीं डालती.
शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि इन खाद्य पदार्थों में फाइबर, हेल्दी फैट, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व होते हैं जो ब्लड शुगर के लेवल को धीमा करने में मदद करते हैं.
शोधकर्ताओं ने पाया कि कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स या स्पोर्ट्स ड्रिंक जैसे मीठे पेय पदार्थों की प्रत्येक अतिरिक्त 350 मिली खुराक से T2D विकसित होने का जोखिम 25 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. हालांकि कि इसकी कोई सुरक्षित न्यूनतम सीमा भी नहीं है कि जितनी मात्रा में इसे पिया जाए.
फलों का रस भी जिम्मेदार
रोजाना 100 प्रतिशत फलों का 250 मिलीलीटर जूस पीने से T2D का जोखिम 5 प्रतिशत बढ़ जाता है. बी.वाई.यू. में पोषण विज्ञान की प्रोफेसर और प्रमुख लेखक कैरेन डेला कोर्टे ने कहा, 'यह विभिन्न शुगर सोर्स और टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम के बीच स्पष्ट खुराक-प्रतिक्रिया संबंध स्थापित करने वाला पहला अध्ययन है. इससे यह पता चलता है कि चीनी को पीना, चाहे सोडा से या जूस से स्वास्थ्य के लिए खाने से अधिक नुकसानदायक है.'
लिक्विड चीनी शरीर पर क्या असर डालती है?
समस्या शरीर में इन पेय पदार्थों में चीनी पहुंचाने के तरीके में है. मीठी ड्रिंक और फलों के रस में अलग-अलग शुगर होती है जो ब्लड स्ट्रीम में तेजी से पहुंचती है और लिवर पर लोड डालती है. इससे लिवर में फैट बढ़ सकता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है.