हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि देश में तंबाकू का सेवन करने वालो की संख्या लगभग 81 लाख तक कम हुई है.यह खुलासा ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे 2016-17 की रिपोर्ट में किया गया.
इस अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में जहां 29.6 फीसदी पुरुष तंबाकू का उपयोग करते हैं, वहीं तंबाकू सेवन करने वाली महिलाओं की संख्या 12.8 फीसदी है. खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को निर्देश दिया है कि वे गुटखा और पान मसाले के उत्पादन और बिक्री पर लगी रोक को सही तरीके से लागू कराए.
बता दें कि देश में तंबाकू के कारण हर साल लगभग 10 लाख लोगों की मृत्यु होती हैं. आकड़ों की मानें तो दुनिया भर में मुंह के कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज इंडिया में ही हैं .
सूत्रों की मानें तो, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव सीके मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के 23 अक्टूबर, 2016 के निर्देश का हवाला देते हुए बिहार, कर्नाटक, मिजोरम, मध्यप्रदेश और केरल के मुख्य सचिवों को छोड़कर सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा है कि वो खाद्य एवं सुरक्षा मानक अधिनियम, साल 2011 में बनाए गए खाद्य एवं सुरक्षा मानक विनियमन के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करें.
इस विनियमन के नियम 2024 के अनुसार, तंबाकू और निकोटिन को हमारे खाने की चीजों में शामिल नहीं किया जा सकता, इसलिए सभी गुटखा एवं पान मसाले जैसे खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई जानी चाहिए, जिसमें तंबाकू और निकोटिन भी शामिल हैं.
एक एक्सपर्ट ने अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर बताया कि सरकार द्वारा तंबाकू, गुटखा, पान मसाले पर बैन लगाने के कारण ही इन चीजों को खाने वाले लोगों में 81 लाख तक कमी देखी गई है. अन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ इंडिया में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में तंबाकू खाने की वजह से कई बड़ी बीमारियां जन्म ले रही हैं. साथ ही इसके कारण कई लोगों की जान भी जा चुकी है. लेकिन अब तंबाकू से होने वाली परेशानियों को काफी हद तक रोका जा सकेगा.