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दिल्ली HC ने प्रेग्नेंसी के 28वें हफ्ते में दी गर्भपात की इजाजत, यह थी वजह

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए प्रेग्नेंसी के 28वें हफ्ते में गर्भपात की इजाजत दी है. भ्रूण की गंभीर असामान्यताओं के चलते ऐसा फैसला दिया गया है. इन असामान्यताओं की वजह से पैदा होने वाले नवजात को कई सर्जरीज से गुजरना पड़ता है, जो बहुत पीड़ादायक होता है. 

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • भ्रूण की गंभीर असामान्यताओं के चलते लिया गया फैसला
  • MTP एक्ट में 24 हफ्ते के बाद गर्भपात की इजाजत नहीं होती है

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HC) ने एक मामले की सुनवाई करते हुए प्रेग्नेंसी के 28वें हफ्ते में गर्भपात की इजाजत दी है. भ्रूण की गंभीर असामान्यताओं के चलते ऐसा फैसला दिया गया है. इन असामान्यताओं की वजह से पैदा होने वाले नवजात को कई सर्जरीज से गुजरना पड़ता है, जो बहुत पीड़ादायक होता है. दरअसल, Medical Termination of Pregnancy (MTP) एक्ट के मुताबिक, 24 हफ्ते के बाद गर्भपात की इजाजत नहीं होती है.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 28 सप्ताह की गर्भवती महिला को भ्रूण की असामान्यता को देखते हुए उसे गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है. उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रजनन की पसंद व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक आयाम है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित है.

कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर महिला को ऐसा करने की इजाजत नहीं दी जाती है तो उसके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर होगा. कोर्ट ने कहा, इसलिए गर्भ की असामान्यता की वजह से महिला को गर्भ बनाए रखने या नहीं रखने के फैसले की आजादी देना ही न्यायपूर्ण है.

मेडिकल विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला

कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड के ओपिनियन के बाद इस तरह का आदेश दिया गया है. दिल्ली हाईकोर्ट भ्रूण स्वास्थ्य और सामान्य जीवन के अनुकूल नहीं है. डॉक्टर्स की रिपोर्ट भी कहती है कि बच्चे के शुरुआती चरण में सर्जरी की जरूरत हो सकती है या फिर कुछ समय बाद ऐसी किसी समस्या से गुजरना पड़ सकता है. कोर्ट ने कहा कि ऐसो बच्चे को किशोरावस्था और वयस्क होने की आयु में भी डॉक्टरों की देखभाल पर निर्भर रहना पड़ सकता है. इसलिए तमाम समस्याओं को देखते हुए गर्भपात की अनुमति देना उचित है.

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