22 मई 1939 को इटली और जर्मनी एक मिलिट्री और राजनीतिक गठबंधन पर सहमत हुए. यही गठबंधन दूसरे विश्वयुद्ध के धुरी राष्ट्र की शुरुआत थी. एक साल बाद जापान भी इसमें शामिल हो गया. जर्मनी के साथ हुए इस ऐतिहासिक समझौते को मुसोलिनी ने 'पैक्ट ऑफ स्टील' नाम दिया. इसके साथ ही उन्होंने रोम और बर्लिन को जोड़ने वाली 'धुरी' की उपमा भी गढ़ी थी.
1939 में हिटलर द्वारा पोलैंड पर आक्रमण के तुरंत बाद ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी, लेकिन मुसोलिनी फिलहाल तटस्थ रहे. जब जर्मनी ने डेनमार्क और नॉर्वे पर किया तो मुसोलिनी आश्वस्त हो गया कि हिटलर युद्ध जीत सकता है. जल्द ही हॉलैंड और बेल्जियम भी हिटलर के अधीन हो गए. तब 22 मई 1939 को इटली और जर्मनी ने पैक्ट ऑफ स्टील संधि पर हस्ताक्षर किए.
इससे आधिकारिक तौर पर धुरी शक्तियों का गठन हुआ. जापान ने सितंबर 1940 में इस संधि पर हस्ताक्षर करके इसमें शामिल हुआ. जून 1940 में जब जर्मन सेना फ्रांस में घुसपैठ कर रही थी, तब मुसोलिनी ने इटली के युद्ध में प्रवेश की घोषणा की. इटली ने 10 जून 1940 को फ्रांस और ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी.
मुसोलिनी इस साझेदारी को न केवल एक रक्षात्मक गठबंधन और पश्चिमी लोकतंत्रों से सुरक्षा समझते थे, जिनके साथ उन्हें युद्ध की आशंका थी, बल्कि अपने बाल्कन अभियानों के लिए समर्थन का स्रोत भी मानते थे. दोनों पक्ष एक-दूसरे से भयभीत थे और अविश्वास भी रखते थे. उन्होंने अपनी भावी योजनाओं को केवल संक्षिप्त रूप से साझा किया.
इसका परिणाम यह हुआ कि इटली और जर्मनी, एक साथ कार्य करने के बजाय, अक्सर एक-दूसरे की जल्दबाजी में की गई सैन्य कार्रवाई पर 'प्रतिक्रिया' देते थे. सितंबर 1940 में, स्टील संधि त्रिपक्षीय समझौता बन गया , जिसमें जापान त्रिपक्षीय संधि का तीसरा घटक था. इसके बाद महायुद्ध फुल स्केल पर शुरू हो गया.