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होर्मुज में आत्माएं! वहां कब सफेद कपड़ा ओढ़कर घूमने लगते हैं लोग?

Hormuz Rituals: होर्मुज के आसपास के इलाकों में जार नाम की एक परंपरा है, जिसमें आत्माओं को दूर करने का दावा किया जाता है.

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होर्मुज के आसपास के इलाकों में जार नाम की परंपरा है. (Photo: Getty)
होर्मुज के आसपास के इलाकों में जार नाम की परंपरा है. (Photo: Getty)

ईरान और अमेरिका के युद्ध को लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज चर्चा में है. होर्मुज को लोग सिर्फ एक समुद्री रास्ते के तौर पर ही जानते हैं, लेकिन होर्मुज से जुड़ी कई ऐसी चीजें हैं, जो काफी दिलचस्प है. जैसे होर्मुज अपनी लाल मिट्टी के लिए भी फेमस है, जिसे लोग खाते भी हैं. इसके अलावा होर्मुज के आसपास के इलाकों में एक 'जार' नाम की परंपरा है, जिसके जरिए आत्माओं को शरीर से बाहर निकाला जाता है. इन दिनों सोशल मीडिया उस परंपरा के वीडियो भी शेयर किए जा रहे हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये क्या परंपरा है और इस परंपरा में क्या किया जाता है...

सोशल मीडिया और लोक चर्चाओं में अक्सर ‘जार’ को भूत-प्रेत भगाने वाली रस्म के तौर पर बताया जाता है, जो होर्मुज के आसपास के इलाकों में निभाई जाती है. ये एक तरह की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रथा है, जो खाड़ी क्षेत्र, पूर्वी अफ्रीका और ईरान के तटीय इलाकों में पाई जाती है. यहां मान्यता है कि कुछ अदृश्य आत्माएं इंसान के शरीर पर काबू पा लेती हैं और उसके व्यवहार को बदल देती हैं.

ऐसे मामलों में व्यक्ति बेचैन हो सकता है, गुस्से में आ सकता है या सामान्य से अलग हरकतें करने लगता है. स्थानीय लोग इसे बीमारी नहीं, बल्कि ‘आत्मा का प्रभाव’ मानते हैं. इसके बाद जार के जरिए उन आत्माओं को शरीर से बाहर किया जाता है. 

इस रस्म में क्या होता है?

जार की रस्म किसी तांत्रिक क्रिया जैसी नहीं होती, बल्कि यह एक सामूहिक आयोजन होता है. इसमें ढोल-नगाड़ों और खास संगीत का इस्तेमाल होता है. लोग एक घेरे में इकट्ठा होते हैं. इसके बाद प्रभावित व्यक्ति को नाचने या झूमने के लिए प्रेरित किया जाता है. फिर धीरे-धीरे वह ट्रांस जैसी स्थिति में पहुंच जाता है. इसके बाद उसे शांत करने की कोशिश की जाती है. इस वक्त इसमें आत्मा का प्रभाव होता है, वो सफेद कपड़े पहनकर डांस करने लगता है. 

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ईरान

द इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यहां के लोग मानते हैं कि दूर देशों से आने वाली हवाएं लोगों को अपने वश में कर सकती हैं और उन्हें बीमार कर सकती हैं. इन हवाओं को दूर भगाने के लिए, वंशानुगत पंथ का नेता एक समारोह आयोजित करता है, जिसमें अगरबत्ती जलाकर और ढोल बजाकर प्रभावित व्यक्ति से हवाओं को बाहर निकालने का प्रयास किया जाता है. इस दौरान महिलाएं खास तरह का मुखौटा पहनती हैं, जिसमें मुंछें भी बनी होती हैं. 

इसके अलावा जो शख्य बीमार है या फिर उसमें आत्मा का प्रभाव है, वो एक बड़े कपड़े से खुद को ढका रहता है और नाचता है. इस बीच, ढोल बजाने वाले ढोल बजाते हैं और अरबी या फारसी में पवन की कविता सुनाई जाती है. 

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