गौरी लंकेश की हत्या के बाद लोगों में गुस्सा है और कोई इस घटना की कड़ी आलोचना कर रहा है. उनकी पहचान दक्षिणपंथी विचारों की तीव्र आलोचक के रूप में थी. वो पहले भी धमकियों का जिक्र कर चुकी थीं. गौरी साप्ताहिक मैगजीन लंकेश पत्रिके की संपादक थीं. इसके साथ ही वो अखबारों में कॉलम भी लिखती थीं.कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि ये आजाद पत्रकारिता पर हमला है. हर भारतीय को इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए. गौरी लंकेश की हत्या पर जावेद अख्तर ने सवाल किया- अगर दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और लंकेश जैसे लोग मारे जा रहे हैं, तो मारने वाले कैसे हैं. वहीं शबाना आजमी ने लिखा, गौरी लंकेश पर हमला दर्दनाक, दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी के हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए.