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कुमार विश्वास की कविता, 'इसी साल हम सब में सूरज झांकेगा'

कुमार विश्वास की कविता, 'इसी साल हम सब में सूरज झांकेगा'

वर्ष 2016 को अलविदा कह अब हम नए वर्ष 2017 में प्रवेश कर रहे हैं. आने वाले वर्ष में देश के आगे कई सपने हैं, जिन्हें पूरा करना है. लाखों आशाओं और उम्मीदों पर खड़ा उतरना है. देशवासी एक बेहतरीन वर्ष की कामना कर रहे हैं. नए वर्ष पर सुनिए कवि कुमार विश्वास की आशा, आंकाक्षा और उम्मीदों को उजागर करती एक कविता.

Poem by Dr Kumar Vishwas for new year 2017

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