सरहद पर शहीद हुए जवानों के शव जब चिता पर रखे गए तो देश की आंख नम हो गईं. किसी के बेटे ने मुखाग्नि दी तो किसी के पिता ने. लेकिन इस पूरे मामले पर जो बात सबको साल रही है वो है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की खामोशी.