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भोपाल में खिलेगा कमल या हाथ पड़ेगा भारी?

आज हम आ पहुचें हैं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में, जिसे झीलों का शहर कहते है.  देखना होगा कि यहां राजनीति का कमल खिलेगा या हाथ का पंजा उसे उखाड़ फेकेगा? जानते हैं क्या संकेत आज भोपाल के सफर में मिलते हैं. भोपाल का अपना मिजाज है.  इस मशहूर झील की लहरों पर फुर्सत के दो पल बिताने के लिए सैलानी देश के कोने-कोने से आते हैं. सबका अपना-अपना दर्द.  कोई GST से परेशान है, कोई सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढ़ों से. किसी को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा, तो कोई महंगाई की मार से बेहाल है.  भोपाल में सत्ता की असली चाबी युवा वोटरों के हाथ में हैं-ऐसे में हम युवाओं के मन को टटोलने के लिए एक कॉलेज पहुंच गए.

Today we have reached Madhya Pradesh capital Bhopal, which is called the City of Lakes. You will see the lotus of politics will bloom there or the claw in the hand will overthrow it. Bhopal has its own mood. Tourist come from every corner of the country to spend some moments of relaxation on the banks of famous lake. Everyone has own pain Some people upset with GST. Some people upset with large pothole on the road. Real keys of power are in the hands of the young voters .

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