1967 में जब देश चौथे लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हो रहा था. तब दुनिया भारत को बेहद ससंकित नजरों से देख रही थी. दो साल के भीतर दो महान प्रधानमंत्रियों को गवाने के बाद भारत को एक ऐसी महिला प्रधानमंत्री मिली थी जिनके पास अपने पिता जवाहरलाल नेहरु की महान विरासत के सिवा कुछ भी नहीं था. कांग्रेस में इंदिरा को प्रधानमंत्री बनाने वालों को लगा कि यह उनकी उंगलियों पर नाचने वाली कठपुतली साबित होंगी.