18 साल की उम्र वाले राज्य उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध नेता नारायण दत्त तिवारी का गुरुवार को देश की राजधानी दिल्ली में निधन हो गया. लंबी बीमारी के बाद तिवारी ने अपने जन्मदिन यानी 18 अक्टूबर को ही आखिरी सांस ली.
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तिवारी का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा. कांग्रेस में रहने के दौरान कभी उन्हें प्रधानमंत्री पद का दावेदार माना जाता था तो कभी राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद के लिए भी उनके नाम की चर्चाएं होती रहीं. वहीं, राज्य की राजनीति में उनको पैराशूट सीएम कहकर उनके और हरीश रावत के बीच भी प्रतिद्वंद्विता चलती रही.
क्या है मामला?
उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में सफल पारी खेलने के बाद तिवारी के लिए उत्तराखंड की राजनीति में सबसे बड़ी मुश्किल वर्ष 2007 में आई. उनके मुख्यमंत्रित्व काल में लाल बत्तियों की बंदर बांट, भ्रष्टाचार, राज्य संपदा के दुरुपयोग, राज्य में निवेश का स्थानीय उम्मीदों पर खरा न उतरना जैसे कई मुद्दे सरकार को परेशान कर रहे थे. इसी समय उत्तराखंड के लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने 'नौछमी नरैणा' गीत की रचना की.
यह गीत कम ही समय में चारों ओर प्रसारित हो गया था और सरकार के विरोधी इसे लेकर सीएम तिवारी पर निशाना साधने लगे थे. इस गीत को तत्कालीन सरकार की अघोषित सेंसरशिप का शिकार होना पड़ा था. इस गाने की सीडी और डीवीडी मार्केट से जब्त कर ली गई थीं. गीत के गायक नरेंद्र नेगी के कार्यक्रमों पर अघोषित रोक लगाई जाने लगी थी.
गंवानी पड़ी थी सत्ता
हड़बड़ाई सरकार की इस प्रतिक्रिया का उल्टा असर देखने को मिला. इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी थी. गीत में उत्तराखंड के राज्य निर्माण के संघर्ष से लेकर भाजपा की पहली सरकार बनने से लेकर तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुखिया तिवारी को निशाने पर लिया गया था. गीत का ज्यादातर हिस्सा तिवारी पर ही केंद्रित है.
तिवारी की सरकार जाना इस गीत का एक पड़ाव था और यह गीत उत्तराखंड के संघर्ष के जनगीतों में शामिल हो गया. इस गीत की रचना प्रक्रिया और बाद के सफर पर पत्रकार मनु पवार ने किताब भी लिखी है कि किस तरह से यह गीत उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचाने के बाद अमेरिका और ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों तक में पहुंचा.
क्या है गाने में?
गीत को उत्तराखंड के लोकगायन की 'जागर' (अपने पूर्वजों और देवताओं का आह्वान करने के लिए गाया जाने वाला गीत) शैली में गाया गया था. गीत गढ़वाली भाषा में है लेकिन हिंदी भाषियों को समझ में आ सकता है. नरेंद्र नेगी का यह गीत उनके सर्वाधिक लोकप्रिय गीतों में से एक है. आज भी उनसे इस गाने की मांग की जाती है.
इस गीत में नारायण दत्त तिवारी को कलियुग के अवतारी पुरुष दिखाया गया था. 'नौछमी नरैणा' से आशय बहुरूपिए नारायण (श्रीकृष्ण का एक नाम) से है जो गोपियों का प्रिय है. इस गीत में नारायण दत्त तिवारी की भूमिका निभा रहे कलाकार को बांसुरी बजाते हुए दिखाया गया है.