कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है. गुरुवार को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक सुरजीत सिंह देसवाल ने फुट ट्रैक की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने मानसरोवर यात्रा के पारंपरिक मार्ग की ओर जाने वाली फुट ट्रैक की स्थिति और सभी व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए लिपुलेख दर्रे पर गए.
इस साल नाथूला मार्ग से 10 और लिपुलेख मार्ग से कुल 18 यात्री दलों के जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है. नाथूला मार्ग से प्रत्येक बैच में 50 यात्री और परंपरागत लिपुलेख मार्ग से प्रत्येक मैच में 60 यात्रियों को ले जाया जाएगा.
Uttarakhand: Surjeet Singh Deswal, Director General ITBP on 12th June went to the Lipulekh pass to take stock of the arrangements and the condition of the foot track leading to the traditional route of the Kailash Mansarovar Yatra. pic.twitter.com/dXcEBOcrF8
— ANI (@ANI) June 14, 2019
गुरुवार को मानसरोवर यात्रियों का पहला जत्था आइटीबीपी की 7वीं वाहिनी मिर्थी, उत्तराखंड पहुंचा जहां उनका भव्य स्वागत किया गया था. इस दल को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 11 जून 2019 को नई दिल्ली से रवाना किया था. 58 सदस्यीय इस पहले दल का आईटीबीपी ने परंपरागत छोलिया डांस और उत्तराखंड की परंपरा के अनुसार स्वागत किया था.
बता दें, कैलाश मानसरोवर तिब्बत में कैलाश माउंटेन रेंज में 21,778 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. हिंदू इसे भगवान शिव का निवास स्थान मानते हैं. 1981 से ही इस यात्रा में आईटीबीपी ने केंद्रीय भूमिका निभाई है. आइटीबीपी कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए सुरक्षा संचार और चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध करवाती है और भारतीय क्षेत्र में यात्रियों की सुगम यात्रा की हर संभव प्रयास करती है.