उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने छह तरह के भत्तों को खत्म कर दिया है. समय-समय पर इन भत्तों का कर्मचारी लाभ उठाते थे. योगी सरकार के फैसले से आठ लाख से ज्यादा कर्मचारियों को नुकसान होगा. सरकार ने गुरुवार को इसका शासनादेश भी जारी कर दिया.
सरकार का कहना है कि जिन भत्तों को खत्म किया गया है, उनकी अब जरूरत नहीं रह गई है. इसलिए पहले की व्यवस्था के मुताबिक जारी ये भत्ते अब तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिए गए हैं. बता दें कि पहले कंप्यूटर संचालन व प्रोत्साहन भत्ता, द्विभाषी टाइपिंग, द्विभाषी प्रोत्साहन भत्ता मिलता था. जबकि अब यह अनिवार्य योग्यता हो गई है. इसी तरह से स्टोर कीपर को नकदी भंडारों व मूल्यवान वस्तुओं की रक्षा के एवज में मिलने वाला कैश हैंडलिंग भत्ता, सीमित परिवार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अधिकतम एक हजार रुपये का परिवार कल्याण प्रोत्साहन भत्ता, परियोजना भत्ता, स्नातकोत्तर भत्ता भी खत्म कर दिया गया है.
दरअसल कर्मचारियों का स्वैच्छिक परिवार कल्याण प्रोत्साहन भत्ता समेत छह भत्ते खत्म करने का फैसला पिछली कैबिनेट बैठक में ही ले लिया गया था, मगर कर्मचारियों की संभावित नाराजगी को ध्यान में रखकर इस आदेश को दबा दिया गया था. यहां तक कि आखिरी कैबिनेट ब्रीफिंग में राज्य सरकार के प्रवक्ताओं ने केवल 18 मामलों पर ही निर्णय की जानकारी दी थी. इन भत्तों पर निर्णय को उस वक्त सार्वजनिक नहीं किया गया था. मगर अब जाकर 22 अगस्त को सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया. द्विभाषी प्रोत्साहन भत्ता के तौर पर 100 व 300 रुपये प्रतिमाह, जबकि स्नातकोत्तर भत्ते के रूप में 4500 रुपये मिलते थे.