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मेरठ: कोरोना से हुई टीचर की मौत तो युवाओं ने खुद ही बना लिया 5 बेड का कोविड वार्ड

मेरठ के खानपुर गांव के रहने वाले अभिषेक चिकारा मैकेनिकल इंजीनियर हैं और गुड़गांव में प्राइवेट जॉब करते हैं. उनका कहना है कि कोरोना महामारी से गांव में करीब 20 लोगों की मौत हो गई लेकिन स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते यहां किसी का कोरोना टेस्ट तक नहीं हो सका. 

मेरठ के एक गांव में युवाओं ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया है. मेरठ के एक गांव में युवाओं ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया है.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इलाज के अभाव में टीचर की हो गई थी मौत
  • युवाओं ने खुद ही बना लिया 5 बेड का कोविड वार्ड
  • सोशल मीडिया के जरिए जुटाते हैं मदद

उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक गांव में इलाज के अभाव में एक टीचर की मौत हो गई. इस घटना ने गांव युवाओं पर ऐसा असर डाला कि उन्होंने एक कोविड वार्ड तैयार कर लिया, जिसमें पांच बेड और ऑक्सीजन सिलेंडर भी है. इतना ही नहीं गांव के युवा पैसे इकट्ठा कर गांव में दवाइयां, ऑक्सीमीटर और मास्क बांट रहे हैं. मामला  मेरठ के खानपुर गांव का है. यह गांव गाजियाबाद, मेरठ और बागपत की सरहद पर है.इस गांव के सरकारी स्कूल में 5 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, जहां ऑक्सीजन की उपलब्धता है. अब तक गांव के 3 से 4 लोगों को ऑक्सीजन दी जा चुकी है.

मेरठ के खानपुर गांव के रहने वाले अभिषेक चिकारा मैकेनिकल इंजीनियर हैं और गुड़गांव में प्राइवेट जॉब करते हैं. उनका कहना है कि कोरोना महामारी से गांव में करीब 20 लोगों की मौत हो गई लेकिन स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते यहां किसी का कोरोना टेस्ट तक नहीं हो सका. 

इसी बीच गांव की एक लोकप्रिय अंग्रेजी शिक्षिका संतोष शर्मा को ऑक्सीजन और इलाज ना मिलने के कारण उनकी मौत हो गई. उनकी उम्र लगभग 68 वर्ष थी. इस घटना के बाद युवाओं ने कोरोना से लड़ने की रणनीति बनाई और गांव में सफाई व्यवस्था, सैनिटाइजर की व्यवस्था ,ऑक्सीमीटर और मास्क बांटकर गांव वालों के सहयोग में जुट गए. 

मेरठ के खानपुर गांव की दिव्यांग संतोष शर्मा 68 साल की थी. संतोष शर्मा निजी स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका थी. गांव में हर कोई उनका सम्मान करता था. इसी बीच संतोष शर्मा को संक्रमण ने अपनी चपेट में ले लिया. संतोष शर्मा के परिजन उन्हें लेकर ऑक्सीजन और अस्पताल की तलाश में मेरठ में 2 दिन तक भटकते रहे लेकिन ऑक्सीजन और इलाज नहीं मिल सका. 4 मई की शाम को संतोष शर्मा की मौत हो गई. 

 अभिषेक चिकारा का कहना है कि मई के पहले हफ्ते में संक्रमण ने कई लोगों को अपनी चपेट में ले लिया. ये सिलसिला तेजी से बढ़ा और गांव के सैकड़ों लोग कोरोना लक्षण वाले बुखार खांसी और सर्दी से पीड़ित हो गए.  गांववाले स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और नेताओं से गुहार करते रहे लेकिन कोई भी मदद को नहीं आया. 

ऑक्सीजन और इलाज के अभाव में तिल तिल कर मरी संतोष शर्मा की मौत से उनके शिष्यों और गांव के युवाओं को बहुत दुख हुआ और उन्होंने गांव की सूरत बदलने की ठान ली और वो भी बिना किसी सरकारी मदद के. एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए देश-विदेश में फैले गांव के लोगों से संपर्क कर युवाओं ने मदद मांगी और गांव को बचाने की मुहिम शुरू कर दी. 


अभिषेक चिकारा बताते हैं कि गांव के 25 से 30 युवाओं ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें अबतक 257 लोग जुड़े हैं. इसमें गांव के वह लोग हैं, जो देश-विदेश में रह रहे हैं, जिनसे सहयोग की अपील की गई तो लोगों ने 5 रुपये से लेकर 11000 रुपये तक का चंदा दिया. इसके बाद गांव के 15 वार्ड के 15 मेंबर बनाए और 15 वार्ड के लिए ऑक्सीमीटर मुहैया कराए गए. इसके अलावा गांव की सफाई कराई गई. मच्छर मारने की दवाई सड़क पर छिड़की गई. पूरे गांव को सैनिटाइज किया गया.

गांव के युवा श्रमदान करके गांव की सफाई और लगातार सैनिटाइजेशन कर रहे हैं. टीम मेंबर अभिषेक चिकारा का कहना है कि गांव के 700 से 800 घरों के लिए उन्होंने 3000 मास्क का इंतजाम किया है जो गांव के हर घर में दिए जाएंगे. 100 थर्मामीटर खरीदे हैं जो गांव में उन घरों को दिए जा रहे हैं जहां संक्रमण के मरीज हैं. 

विटामिन सी जैसी दवाइयां खरीदी गई हैं जो गांव में हर घर में दी जा रही हैं. गांव को लगातार सैनिटाइज किया जा रहा है. टीमें बनाकर घर में आइसोलेट मरीजों को निगरानी की जा रही है और गांव के ही दो प्राइवेट डॉक्टरों के जरिए मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है. 

फिलहाल मौतों का सिलसिला थम गया है. हालांकि गांव के लोगों का कहना है कि गांव के बदलाव की खबरें जब बाहर तक पहुंची तब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यहां कुछ कोरोना टेस्ट किए हैं और 80 से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई है.


 

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