उत्तर प्रदेश के आगरा में महामारी कोरोना वायरस के लगातार बढ़ रहे खतरे के बीच एक राहत देने वाली खबर आई है. कोरोना पॉजिटिव पाई गई एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया है. कोरोना पीड़ित गर्भवती महिला को बुखार आने के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में में भर्ती कराया गया था. जांच में महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी.
महिला का एसएन मेडिकल कॉलेज के कोविड-19 हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. महिला को लेबर पेन शुरू हुआ तो मेडिकल कॉलेज की 3 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने पीपीई किट पहनकर महिला की सफल डिलीवरी कराई. महिला ने शनिवार को स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है.
बच्चे के जन्म के बाद उसको महिला की रिश्तेदार के हाथों में सौंप दिया गया. उसका दो दिन बाद कोरोना टेस्ट होगा. हालांकि, यह माना जाता है कि गर्भ में बच्चा कोरोना संक्रमित नहीं होता है. महिला की डिलीवरी के बाद मेडिकल कॉलेज में उत्साह का माहौल नजर आया. चिकित्सकों की टीम ने हाल ही में दो और कोरोना पीड़ित महिला की डिलीवरी करवाई थी. इस टीम के हाथों से यह तीसरी डिलीवरी हुई है.
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बता दें कि उत्तर प्रदेश में आगरा कोरोना का केंद्र बना हुआ है. उत्तर प्रदेश में कोरोना के 1800 से ज्यादा मामले हैं, वहीं अकेले आगरा में ही 350 से ज्यादा मरीज हैं. आगरा कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में शीर्ष पर है.
मुंबई में कोरोना संक्रमित दो महिलाओं ने दिया बच्चों को जन्म
मुंबई के नानावती अस्पताल में Covid-19 पॉजिटिव दो महिलाओं ने दो स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया था. 35 साल की महिला ने बेटी को जन्म दिया. यह महिला दक्षिण मुंबई की रहने वाली है. वहीं मुंबई के एक उपनगर की रहने वाली 25 साल की एक और महिला ने बेटे को जन्म दिया. दोनों बच्चों को उनकी मां से अलग रखने का विशेष इंतजाम किया गया.
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इन दोनों Covid-19 पॉजिटिव प्रेग्नेंट महिलाओं को एडमिट करने से पहले ही प्रसूति और स्त्री रोग विभाग, संक्रामक बीमारी विशेषज्ञों और शिशु रोग विभाग ने पूरे समन्वय के साथ एक्शन प्लान बनाया. नानावती अस्पताल के प्रसूति और स्त्री रोग विभाग में वरिष्ठ सलाहकार डॉ सुरूचि देसाई ने कहा, “ऐसी बहुत कम सर्जरी ही भारत में हुई है. इसके लिए स्पेशल अब्स्टेट्रिक्स यूनिट (विशेष प्रसूति इकाई) बनाई गई, जहां संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल्स का पूरा ध्यान रखा गया. हमने सर्जिकल स्टाफ को कम से कम रखा और उन्हें PPE के इस्तेमाल के लिए ट्रेंड किया गया. स्पेशल COVID कॉरिडोर भी बनाए गए जिससे मां और बच्चे को सुरक्षित लाया ले जाया जा सके.”
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