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उत्तर प्रदेश में ठाकुर वोट सहेजने में जुटी समाजवादी पार्टी

पिछले विधानसभा चुनाव में यादव-मुस्लिम-ठाकुर वोटों की तिकड़ी के सहारे यूपी में परचम लहराने वाली सपा को अखिरकार मुजफ्फरनगर दंगों के बाद बने माहौल में जिताऊ समीकरण के दरकने का डर सताने लगा है. यही वजह है कि पार्टी यादव और मुस्लिम वोट बैंक के साथ ठाकुर वोटों को भी साधने में जुट गई है.

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राजा भैया
राजा भैया

पिछले विधानसभा चुनाव में यादव-मुस्लिम-ठाकुर वोटों की तिकड़ी के सहारे यूपी में परचम लहराने वाली सपा को अखिरकार मुजफ्फरनगर दंगों के बाद बने माहौल में जिताऊ समीकरण के दरकने का डर सताने लगा है. यही वजह है कि पार्टी यादव और मुस्लिम वोट बैंक के साथ ठाकुर वोटों को भी साधने में जुट गई है.

पिछले हफ्ते अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री राजा अरिदमन सिंह की पत्नी पक्षालिका सिंह को फतेहपुर सीकरी लोकसभा चुनाव में पार्टी का टिकट थमाने के बाद अब बाहुबली नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को दोबारा प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में जगह देना नाराज ठाकुर मतदाताओं को मनाने की भरसक कोशिश की गई है.

कुंडा, प्रतापगढ़ में इसी साल मार्च के महीने में सीओ जियाउल हक समेत तीन लोगों की हुई हत्या में सीबीआइ से क्लीनचिट मिलने के बाद राजा भैया को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करने पर सपा सरकार के भीतर ठाकुर नेता नाराज चल रहे थे. इसी नाराजगी को भुनाने के लिए बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह लगातार इन नेताओं के संपर्क में थे. राजनाथ के करीबी नेता राजा भैया को बीजेपी के साथ जोडऩे की भरसक कोशिश में लगे थे. इसकी भनक सपा के राष् ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को मिलने के बाद उन्होंने सरकार में राजा भैया के सबसे मुखर विरोधी आजम खान को आगे किया. आजम खान राजा भैया से मिलने खुद उनके घर गए. इसके बाद से राजा भैया के मंत्रिमंडल में शामिल होने की सुगबुगाहट बढ़ गई थी.

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यही नहीं मुजफ्फरनगर दंगे के सिलसिले में हुए उपद्रव के बाद सपा नेतृत्व को राजा भैया की जरूरत महसूस होने लगी थी. पिछले दिनों मेरठ के खेड़ा इलाके में हुए तनाव के बाद ठाकुर बिरादरी के निशाने पर प्रदेश की सरकार आ गई थी. तुरंत डैमेज कंट्रोल करने के लिए सरकार ने बलिया में तैनात ठाकुर आइपीएस अधिकारी ओंकार सिंह को मेरठ का एसएसपी बनाकर भेजा. इसके बावजूद इस बिरादरी में सपा सरकार के विरोध में गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा था.

ठाकुरों के गुस्से की एक बड़ी वजह सरकार में मंत्री पद संभालने वाले ठाकुर नेताओं को एक-एक करके महत्वहीन पद सौंपना भी है. राजा भैया को मंत्री पद से हटाने के पहले उनसे कारागार जैसा महत्वपूर्ण महकमा छीनकर सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी को दे दिया गया था. इसके अलावा राजा अरिदमन सिंह को परिहवन विभाग के कैबिनेट मंत्री से खिसका कर स्टांप एवं ड्यूटी जैसा महत्वहीन विभाग थमा दिया और इसी तरह एक और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सिंह का विभाग हल्का किए जाने के बाद से सपा से ठाकुर मतदाता नाराज चल रहे थे.

बीजेपी प्रवक्ता चंद्र मोहन सिंह बताते हैं कि पश्चिमी जिलों में हुए दंगों में ठाकुरों पर मरहम लगाने के लिए सपा ने राजा भैया का सहारा लिया है, जिसका कोई फायदा मिलने वाला नहीं है. सिंह कहते हैं ‘राजा भैया को मंत्रीमंडल में शामिल करके सपा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि इस सरकार में दागियों को हर तरह का संरक्षण मिलेगा.’

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उधर, राजा भैया को मंत्रिमंडल में शामिल करने के बावजूद सपा की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं. शुक्रवार को राजा भैया के शपथ ग्रहण से एक दिन पहले कैसरगंज सीट से सपा के लोकसभा सदस्य ब्रजभूषण सिंह ने सपा प्रत्याशी के तौर पर अगला लोकसभा चुनाव लडऩे से मना कर दिया है. पूर्वांचल में ठाकुर बिरादरी में खासी पैठ रखने वाले ब्रजभूषण के अचानक लिए गए इस निर्णय से सपा नेतृत्व सकते में है. ब्रजभूषण ने 1991 और 1999 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और उम्मीद लगाई जा रही है कि वह बीजेपी में लौटने की तैयारी कर रहे हैं.

ब्रजभूषण के करीबी एक नेता बताते हैं कि ब्रजभूषण के बीजेपी में लौटने पर उन्हें गोंडा संसदीय क्षेत्र से केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के सामने उतारा जा सकता है. हालांकि सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी किसी भी नेता के सपा से साथ छोडऩे की आशंका को दरकिनार करते हैं. चौधरी कहते हैं ‘ सपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है. अगर कोई नेता किसी बात पर नाखुश है तो उसे मना लिया जाएगा.’

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