सुरेंद्र से बदनसीब शायद ही कोई होगा. ट्रेन से गिरकर भी जिसे मौत अपनी आगोश में न ले सकी, उसकी मौत अस्पताल में पानी न मिलने से हो गई. झकझोर कर रख देने वाली इस घटना ने यूपी के अस्पतालों के कुप्रबंध को उजागर कर दिया है, जहां भर्ती होना मरीजों के लिए काला पानी की सजा सरीखा है.
बिहार के मुजफ्फरपुर इलाके के होलियापारा निवासी सुरेंद्र मांझी (35) ट्रेन हादसे में एक पैर गवांने के बाद गंभीर हालत में सोमवार को सीतापुर के जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था. पैर कटने से वह चल नहीं सकता था. उसके पास पीने का पानी नहीं था, जिसके कारण उसने पड़ोस के बेड पर रखी ग्लूकोज की बोतल दांतों से काटकर पीने का प्रयास किया, लेकिन सफल न हो सका. इससे उसकी हालत बहुत बिगड़ गई.
काफी देर बाद जब वार्ड ब्वॉय की नजर मरीज की ओर गई, तो वह मरणासन्न हो चुका था. उसे पानी पिलाने की कोशिश की गई, पर बात नहीं बनी. कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया. इसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया.
युवक की मौत के बाद वार्ड में सुधार के नाम पर सिर्फ सफाई व्यवस्था-दुरुस्त की गई है, लेकिन मरीजों की देखभाल की स्थिति पहले जैसी ही है. बुधवार को भी महिला ने आरोप लगाया कि उसे खाना तो मिला, लेकिन पैर की मरहम पट्टी नहीं हुई है.