अजूबा बन चुके मैडम तुसाद संग्रहालय और वहां रखे मोम के आदमकद पुतले पूरी दुनिया में मशहूर हैं. इसकी वजह ये है कि मोम के पुतले हर जगह सुरक्षित नहीं रखे जा सकते क्योंकि उनके पिघलने या टूटने का खतरा बना रहता है.
मगर अब ऐसा नहीं होगा. काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के मालवीय उद्यमिता एवं संवर्धन विकास केंद्र (एमसीआईआईइ) में मोम की ऐसी बेहतरीन एवं नायाब मूर्तियां बनने की कवायद चल रही है की आप दंग रह जाएंगे.
नायाब इसलिए कि ये न तो 70 डिग्री सेल्सियस के भीषण तापमान पर पिघलेंगी और न ही -70 डिग्री सेल्सियस के थरथरा देने वाले तापमान पर टूटेंगी. इस मोम से बने पुतले को अब आप अपने घर में भी रख सकते हैं.
एमसीआईआईइ के प्रत्युष उपाध्याय पॉलिमर तत्वों की सहायता से मोम में हार्डनर मिलाकर मूर्ति बनाने में कामयाब हुए हैं. उन्होंने इन मूर्तियों का वैज्ञानिक परीक्षण भी करवाया है. प्रत्युष बताते हैं कि इस मोम की खासियत यह है कि कितनी भी गर्मी पड़े, यह पिघलता नहीं.
परीक्षण सफल होने के बाद अब केंद्र में पं. मदन मोहन मालवीय की आदम कद प्रतिमा बनाने का काम चल रहा है. सह समन्वयक डा. प्रदीप श्रीवास्तव बताते हैं कि फिलहाल अभी ट्रायल के लिए भगवान की प्रतिमाएं बनाई गई हैं.