प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से बाहुबली विधायक और जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया के पिता राजा उदय प्रताप लगातार दूसरे धरने पर बैठे हैं. उनके धरना प्रदर्शन से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. सारा दिन राजा उदय प्रताप सिंह को मनाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़े हैं.
बुधवार देर रात धरने में शामिल होने के लिए बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया के दोनों बेटे भी पहुंचे थे. उसके थोड़ी देर बाद जिलाधिकारी नितिन बंसल और पुलिस अधीक्षक सत्यपाल अंतिल भी धरना खत्म कराने के लिए पहुंचे, लेकिन राजा उदय प्रताप सिंह 'मस्जिदनुमा' गेट हटवाने के बाद ही धरना खत्म करने की बात कर रहे हैं.
कहां से शुरू हुआ विवाद?
कुंडा कोतवाली के शेखपुर आशिक गांव में एक लंगूर की 2011 में मोहर्रम के दिन ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. लंगूर के हत्यारे का अब तक पता नहीं चला है. खैर 2014 में इसी लंगूर की याद में राजा उदय प्रताप सिंह ने एक हनुमान मंदिर बनवाया और उसी साल से मोहर्रम के दिन हनुमान मंदिर पर भंडारे का आयोजन करते हैं.
मोहर्रम के दिन भंडारे के आयोजन से मुस्लिमों को ताजिया ले जाने में परेशानी शुरू हुई. 2014 में किसी तरह ताजिया दफन किया गया, लेकिन 2015 में ताजिया दफन को लेकर खूब बवाल हुआ था. 2015 में सूबे में सपा की सरकार थी और भंडारे का आयोजन किया गया था. इस वजह से शेखपुर आशिक गांव में तीन दिन तक ताजिया नहीं उठा.
इसके बाद 2016 में मोहर्रम के दिन ही भंडारे के आयोजन को लेकर मुस्लिम पक्ष हाई कोर्ट पहुंचा, जिसमें कोर्ट ने जिला प्रशासन को अपने स्तर से मामले को संभालने के लिए कहा तो उसके बाद से मोहर्रम के दिन ही बड़े राजा उदय प्रताप को उनको भदरी कोठी पर ही नजरबंद किया जाता है. 2016 से लेकर हर साल वह नजरबंद कर दिए जाते हैं.
एक गेट को लेकर बवाल
इस बार भी मोहर्रम से पहले राजा उदय प्रताप सिंह को नजरबंद किए जाने की कोशिश की जा रही थी. उससे पहले उन्होंने शेखपुर आशिक में बनाए गए एक गेट पर सवाल उठा दिया. इस गेट को मुस्लिम समुदाय की ओर से बनवाया गया है. राजा उदय प्रताप सिंह का आरोप है कि हिंदुओं की धार्मिक भावना भड़काने के लिए यह गेट बनवाया गया है.
पहले राजा उदय प्रताप सिंह ने गेट हटाने की मांग ट्विटर के जरिए की, लेकिन दूसरे दिन ही वह धरने पर बैठ गए. उनका कहना है कि जब तक गेट नहीं हटेगा, तब तक हम नहीं हटेंगे. जिला प्रशासन के आला अधिकारी मान-मनौव्वल कर रहे हैं, लेकिन राजा उदय प्रताप सिंह मानने को तैयार नहीं हैं और उनका धरना जारी है.
(रिपोर्ट- सुनील यादव)