यूपी के झांसी में हुए पुष्पेंद्र यादव एनकाउंटर मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने झांसी के एसएसपी को निर्देश दिया है कि साल 2019 में हुए पुष्पेंद्र यादव एनकाउंटर मामले में मृतक की पत्नी के बयान के आधार एक FIR दर्ज की जाए. अदालत ने गुरसहाय और मोठ पुलिस थानों के एसएचओ को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता शिवांगी यादव की FIR उसके बयान के साथ दर्ज की जाए कि उसका पति फर्जी मुठभेड़ में मारा गया था.
कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया कि मामले में सुनवाई की अगली तारीख 29 सितंबर को FIR की कॉपी उसके सामने रखी जाए. याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि मोठ पुलिस थाने के तहत एक फर्जी मुठभेड़ में 5 अक्टूबर, 2019 को उसके पति पुष्पेंद्र सिंह यादव की हत्या की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया जाए.
'SSP ने नहीं दर्ज की थी FIR'
अदालत की जस्टिस सुनीत कुमार और सैयद वाइज मियां की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि 19 फरवरी, 2020 को इस अदालत के विस्तृत आदेश के संबंध में यह न्याय के हित में होगा कि याचिकाकर्ता का उसके पति को फर्जी मुठभेड़ में बेरहमी से मार दिया गया था, इसे दर्ज करने की जरूरत है. याचिकाकर्ता के अनुसार, उसने 11 अक्टूबर, 2019 को एक आवेदन के साथ झांसी के एसएसपी से संपर्क किया था, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी.
'मुठभेड़ के बाद मिटा दिए थे सबूत'
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुष्पेंद्र सिंह यादव को पुलिस ने एक फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया था. सबूत मिटाने और इसमें शामिल अधिकारियों को बचाने के लिए उनके परिवार के सदस्यों की अनुपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया. याचिकाकर्ता द्वारा यह भी आरोप लगाया गया है कि मुठभेड़ और उसके पति की मौत से संबंधित दस्तावेज परिवार के सदस्यों को नहीं दिए गए. याचिकाकर्ता ने अदालत से उत्तर प्रदेश सरकार को मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो को भेजने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है.
कौन था पुष्पेंद्र यादव?
झांसी पुलिस के हाथों मारा गया पुष्पेंद्र यादव झांसी के करगुआं गांव का रहने वाला था. उसके पिता सीआईएसएफ में थे. पिता की आंखों की रोशनी चले जाने के बाद पुष्पेंद्र के बड़े भाई रवींद्र को उनकी जगह नौकरी मिल गई थी, जबकि पुष्पेंद्र का एक और भाई दिल्ली मेट्रो में नौकरी करता है. घरवालों के मुताबिक पुष्पेंद्र के पास दो ट्रक थे, जिनसे वो बालू और गिट्टी की ढुलाई करता था.
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, पुष्पेंद्र पर पुलिस ने आरोप लगाया था कि 5 अक्टूबर, 2019 की रात वह मोठ थाने के इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह चौहान पर हमला करने के बाद उनकी कार लूटकर भाग रहा था. जिसके चलते अगली सुबह पुलिस ने पुष्पेंद्र यादव को गुरसराय थाना क्षेत्र में एक मुठभेड़ में कथित तौर पर मार दिया था. पुलिस के मुताबिक उसके 2 साथी भाग निकले थे. पुलिस का ये भी आरोप है कि पुष्पेंद्र की कार से दो तमंचे कारतूस और मोबाइल भी बरामद किए गए.