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मथुरा: अखिल भारत हिंदू महासभा ने मांगी ईदगाह परिसर में आरती की अनुमति, डीएम ने कहा- सवाल ही नहीं

राज्यश्री चौधरी ने गुरुवार को कहा कि अगर उन्हें अनुमति नहीं मिलती है तो उनकी जगह प्रशासन आरती कर सकता है और उसका वीडियो महासभा को भेज सकता है.

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-फाइल फोटो.
-फाइल फोटो.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महासभा ने 7 सितंबर को भी मांगी थी अनुमति
  • प्रशासन ने मंदिर परिसर को रेड जोन किया था घोषित

अखिल भारत हिंदू महासभा ने एक बार फिर यूपी के मथुरा में जिला प्रशासन से 10 दिसंबर को शाही मस्जिद ईदगाह परिसर में भगवान कृष्ण की आरती करने की अनुमति मांगी है. एबीएचएम की राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यश्री चौधरी ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन को सात सितंबर को भी पत्र भेजा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के हम आरती नहीं करेंगे.

राज्यश्री चौधरी ने गुरुवार को कहा कि अगर उन्हें अनुमति नहीं मिलती है तो उनकी जगह प्रशासन आरती कर सकता है और उसका वीडियो महासभा को भेज सकता है. उन्होंने कहा कि 11 दिसंबर को महासभा अपनी अगली रणनीति पर फैसला लेगा.

उधर, जिला मजिस्ट्रेट नवनीत सिंह चहल ने कहा कि अनुमति नहीं दी गई है क्योंकि वहां किसी नई परंपरा को शुरू करने की अनुमति देने का कोई सवाल ही नहीं है. इस मामले को लेकर प्रशासन सतर्क है और मथुरा के सौहार्द को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश पर कार्रवाई की जाएगी. किसी को भी ब्रजभूमि की शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

इससे पहले, अखिल भारत हिंदू महासभा ने घोषणा की थी कि वह ईदगाह परिसर में भगवान की मूर्ति स्थापित करेगी और परिसर की शुद्धि की रस्म पूरी करेगी. इसके बाद मथुरा प्रशासन ने जिले में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करते हुए अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात कर दिया था और मंदिर परिसर को रेड जोन घोषित कर दिया था. फिर 1 दिसंबर को महासभा ने अपनी घोषणा को वापस ले लिया था.

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डिप्टी सीएम मौर्य ने पिछले हफ्ते किया था ट्वीट
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पिछले हफ्ते ट्वीट किया था कि अयोध्या और वाराणसी की तर्ज पर मथुरा में भव्य मंदिर बनाने की तैयारी चल रही है. मौर्य भाजपा के पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के पहले इस तरह का बयान दिया है. 

दरअसल, मथुरा में एक मस्जिद है, शाही ईदगाह जो एक मंदिर के बगल में स्थित है. मस्जिद वाले भूमि को भगवान कृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है. हिंदू संगठनों का दावा है कि ईदगाह उस भूमि पर बनाई गई थी, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था.

 

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