सुप्रीम कोर्ट ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) की ओर से 2009 में जारी किए गए 'कमांड एग्जिट प्रमोशन पॉलिसी' ऑर्डर के खिलाफ केंद्र सरकार की दलील को न मानते हुए सेना के फैसले को बरकरार रखा है. लेफ्टिनेंट कर्नल पीके चौधरी की ओर से दायर की गई याचिका पर एएफटी ने यह ऑर्डर पास किया था.
कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह आदेश भी दिया कि भारतीय सेना में कॉम्बेट स्पोर्ट यूनिट के लिए कर्नल के 141 पद की नियुक्ति निकाली जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल की पॉलिसी को रद्द करने के सरकार के फैसले को नहीं माना. 2009 में बनाई गई इस पॉलिसी को आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यनूल ने रद्द कर दिया था जिसके खिलाफ केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.
इन यूनिटों को मिलती है सुविधा
दरअसल, भारतीय सेना में इंफेंट्री और आर्टिलरी जैसी युद्ध में जाने वाली यूनिट के अफसरों को ही कर्नल के तौर पर प्रमोशन दी जाती है जबकि इंजीनियिरंग जैसी यूनिटों को ये सुविधा नहीं है.
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखी दलील
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि है कि कॉम्बेट यूनिटों में कम उम्र के अफसर रखने के लिए ये कदम उठाया गया. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि इस वक्त पाकिस्तान में ऐसे अफसरों की औसत उम्र 35 साल, जबकि चीन में 40 साल है.