भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव का पद सुरावरम सुधाकर रेड्डी छोड़ना चाहते हैं. दो साल पहले सुधाकर रेड्डी तीसरी बार सीपीआई के महासचिव बने थे. सुधाकर रेड्डी ने पार्टी की सेंट्रल सेक्रेटेरियट और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आधिकारिक तौर पर पद छोड़ने की बात कही थी. 76 वर्षीय सुधाकर रेड्डी ने कहा कि अब उनकी सेहत ठीक नहीं रहती, इसलिए उन्हें पार्टी के सर्वोच्च पद से मुक्त किया जाए. रेड्डी पार्टी में सात वर्ष से महासचिव के पद पर हैं.
हालांकि, पार्टी की सेंट्रल सेक्रेटेरियट और राष्ट्रीय कार्यकारिणी दोनों ने ही सुधाकर रेड्डी से कहा है कि वे अप्रैल 2021 तक अपना कार्यकाल पूरा करें. लेकिन सुधाकर रेड्डी ने कहा कि अब उनकी खराब सेहत उनके काम में बाधा पहुंचा रही है. 20 जुलाई को दिल्ली में होने जा रही पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में वह अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा करने के लिए अड़े हैं. यानी, सीपीआई नेशनल काउंसिल अगले महीने तक महासचिव पद के लिए किसी व्यक्ति को खोज लेगी. ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि पार्टी ने महासचिव पद के लिए के लोगों के नाम पर विचार करना शुरू कर दिया है.
आमतौर पर महासचिव पद के लिए उपयुक्त व्यक्ति का चयन सेंट्रल सेक्रेटेरियट से किया जाता है. सेंट्रल सेक्रेटेरियट में दिल्ली से डी राजा, यूपी से अतुल कुमार अंजन, पंजाब से एआईटीयूसी महासचिव अमरजीत कौर और केरल से बिनॉय विस्वम प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं. ये चारों ही पार्टी के यूथ विंग से बढ़कर आगे आए हैं. सीपीआई केरल के सचिव कनम राजेंद्रन भी रेस में हैं.
सुधाकर रेड्डी के पद छोड़ने की बात ऐसे समय आई है जब सीपीआई लोकसभा चुनाव में हारने के बाद बुरी तरह से प्रभावित हुई है. लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के कारण देश में सीपीआई और सीपीएम दोनों ही दलों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है.
पार्टी सूत्रों ने बताया कि 77 वर्षीय कम्युनिस्ट नेता ‘‘अधिक यात्रा नहीं कर सकते हैं, उन्हें फेफड़े की समस्या, एसी से एलर्जी और अत्यधिक गर्मी एवं ठंड में परेशानी होती है.’’ भाकपा के एक वरिष्ठ नेता ने ‘पीटीआई’ को बताया, ‘‘वह (रेड्डी) सेवानिवृत्ति के लिये अड़े हुए हैं.’’