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दिल्ली: महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष कार्यबल गठित

महिलाओं के खिलाफ अपराध से निपटने के लिए सख्त कानून बनाने की जबर्दस्त मांग के बीच मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव के नेतृत्व में 13 सदस्यीय विशेष कार्य बल का गठन किया गया जो हर पखवाड़े राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं से जुड़े सुरक्षा विषयों की समीक्षा करेगा.

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सुशील कुमार शिंदे
सुशील कुमार शिंदे

महिलाओं के खिलाफ अपराध से निपटने के लिए सख्त कानून बनाने की जबर्दस्त मांग के बीच मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव के नेतृत्व में 13 सदस्यीय विशेष कार्य बल का गठन किया गया जो हर पखवाड़े राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं से जुड़े सुरक्षा विषयों की समीक्षा करेगा.

गृह मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, कार्य बल नियमित रूप से दिल्ली पुलिस के कामकाज की समीक्षा करेगा. यह महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पुलिस और दिल्ली सरकार की ओर से उठाये गए कदमों की भी लगातार समीक्षा करेगा.

इस कार्यबल के सदस्य दिल्ली के मुख्य सचिव, दिल्ली के पुलिस आयुक्त, दिल्ली पुलिस विशेष आयुक्त (यातायात), विशेष आयुक्त (कानून एवं समीक्षा) और दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष होंगे.

कार्यबल के अन्य सदस्य एनडीएमसी के अध्यक्ष, यातायात आयुक्त, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार, पूर्वी, उत्तरी एवं दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त, उत्पाद आयुक्त और गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (यूटी) हैं.

बयान में कहा गया है कि कार्यबल ऐसे किसी सदस्य को भी शामिल कर सकता है जिसे वह उपयुक्त समझता है.

सरकार की ओर से इस कार्य बल के गठन का निर्णय 16 दिसंबर को दिल्ली में चलती बस में 23 वर्षीय युवती से गैंगरेप और सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मौत की घटना के बाद जबर्दस्त जनाक्रोश के मद्देनजर लिया गया.

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बहरहाल, इस घटना को लेकर लोगों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा और जंतर-मंतर पर आकर लोगों ने महिलाओं के खिलाफ आपराध करने के मामले में दोषियों को दंडित करने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की.

सरकार ने राजनीतिक पार्टियों से महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करने और त्वरित न्याय के लिए कानून में संशोधन करने को लेकर गठित न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति को अपने विचार देने को कहा है.

राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को लिखे अपने पत्र में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि सरकार ने महिलाओं के खिलाफ क्रूर प्रकृति के यौन उत्पीड़न से जुड़े मौजूदा कानून की समीक्षा की जरूरत को लेकर तीखे विचार प्रकट किये हैं. इस संबंध में न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति के समक्ष सुझाव दिये जा सकते हैं.

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