scorecardresearch
 

स्पीकर का पद सजावट का नहीं: मीरा कुमार

इंडिया टुडे के संपादक प्रभु चावला ने आजतक के सीधी बात कार्यक्रम में लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार से बात की. मीरा कुमार का मानना है कि स्‍पीकर का पद जिम्‍मेदारियों से भरा है, महज सजावटी नहीं. पेश हैं प्रमुख अंशः

Advertisement
X
मीरा कुमार
मीरा कुमार

इंडिया टुडे के संपादक प्रभु चावला ने आजतक के सीधी बात कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से बात की. प्रमुख अंशः

आपको मुबारक! आप भारत की पहली महिला स्पीकर हैं. आपके सामने जो इतने सारे आदमी बैठते हैं, उनके ऊपर आप कंट्रोल कर सकेंगी? मुश्किल होगी कि नहीं, उनको कंट्रोल करने में?
कंट्रोल क्या करना? कई तो काफी वरिष्ठ हैं, सम्मानित हैं. सबसे बड़ी बात यह कि जिस दिन मैं सर्वसम्मति से चुनी गई, सभी दल के नेताओं ने मुझे आश्वासन और वचन दिया कि वे सदन चलाने में सहयोग करेंगे. मैं समझती हूं कि वे अपना वचन निभाएंगे.
  
 वैसे, नेता तो वचन देते हैं फिर भूल जाते हैं.
 मीरा कुमार हंस देती हैं.

लगभग 16 पार्टियों ने आपका समर्थन किया, आपने कांग्रेस से औपचारिक इस्तीफा दे दिया कि नहीं?
आवश्यकता नहीं है. संविधान ऐसा नहीं कहता है कि आप स्पीकर बनने के बाद इस्तीफा दे दीजिए.

दो दिन पहले आपको जल संसाधन मंत्री बनाया गया. फिर दो दिन बाद कहा कि आप स्पीकर बन जाइए. इसमें कोई राजनैतिक रहस्य है या सामाजिक रहस्य?
कोई रहस्य नहीं है. जब उन्होंने मुझे मंत्री बनाया तो उस समय मन बन चुका था कि मुझे स्पीकर ही बनाया जाएगा.

हर पार्टी दलित को सिर्फ सजावट का पद देती है. कोई दलित वित्त मंत्री नहीं बनता. लगता नहीं कि आपके साथ भी 'सिंबॉलिज्म' (प्रतीकवाद) है.
स्पीकर के पद में बहुत जिम्मेदारी है. धारणा है कि स्पीकर का पद सजावट का पद है, लेकिन ऐसा नहीं है.
 
आप आइएफएस अधिकारी रही हैं, एक अच्छी डिग्री आपके पास है. अच्छी वित्त मंत्री हो सकती थीं, गृह मंत्री बन सकती थीं.
आप मुझसे काल्पनिक सवाल पूछ रहे हैं.{mospagebreak}नहीं, 'सिंबॉलिज्म' के ऊपर पूछ रहा हूं.
प्रतीक भी तो जरूरी होते हैं. हमारी राष्ट्रपति बनीं, कहा गया कि एक प्रतीक हैं. उनके राष्ट्रपति बनने से एक बहुत अच्छा संदेश भी गया. बहुत सारे गांवों में महिलाओं को लगा कि महिला सशक्तीकरण हो रहा है. फिर इतना भी तो सिंबॉलिक नहीं है स्पीकर का पद और राष्ट्रपति का पद. इसमें तो बहुत सारी जिम्मेदारी भी है.

मैं आपके बाबूजी से मिला था. जब उनका मौका आया प्रधानमंत्री बनने का... उनके मन में एक दुःख था कि चूंकि वे दलित थे इसलिए पार्टी में कुछ लोग उनके खिलाफ खड़े हो गए.
हमारा समाज जन्म प्रधान समाज है, जन्म को लेकर जो परिस्थिति है, वह छायी रहती है. आपने कौन-सी डिग्री हासिल की है, आप कितने चरित्रवान हैं, आपने कितनी कुर्बानी दी, इन सबसे आपका परिचय पूरा नहीं होगा जब तक कि समाज यह न जाने कि आपकी जाति क्या है? इनको समाप्त करने की दिशा में काम हो रहा है, होना चाहिए.

आपने कहा कि कर्म प्रधान समाज होना चाहिए. जब तक आरक्षण नहीं हटाएंगे तो देश कैसे कर्म प्रधान बनेगा?
कुछ लोगों का मत है कि आरक्षण के बिना ही लोगों को बराबर का मौका देना चाहिए. देखा गया है कि समाज के कुछ वर्ग हैं जिनको बराबर का मौका नहीं मिला. यह लंबे समय से होता रहा है. महिलाओं को कहा गया कि सूरज की किरण भी उनको स्पर्श नहीं करे. अगर उन्हें पूरा मौका नहीं मिलेगा तो जो शुरुआती दौर है उसमें उनके साथ अन्याय हो जाएगा.

इस बारे में पार्टियां अपने संविधान में महिला आरक्षण को लेकर खुद क्यों नहीं संशोधन करतीं. आपकी पार्टी की अध्यक्ष महिला हैं, भाजपा की सदन की नेता महिला हैं, एक दलित महिला मुख्यमंत्री हैं. महिलाएं तो खुद ऊपर आ रही हैं...
ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिन पर चुनाव आयोग को सोचना होगा. जनप्रतिनिधित्व कानून को देखना होगा. मगर जो अभी सामने स्थिति है कि एक विधेयक आया हुआ है, और आम सहमति के इंतजार में है.{mospagebreak}वही तो आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनके आने वाली है. सदन के अंदर तो लोग आत्महत्या करने के लिए तैयार बैठे हैं.
शरद यादव जी बहुत सम्मानित नेता हैं, देखा जाएगा कि क्या बात है? सदन तो इसीलिए है कि आम सहमति से जो बात बनती है, उसको लागू किया जाए. इस बार 58 महिलाएं सांसद बनके आई हैं. वातावरण तो लग रहा है अनुकूल. स्पीकर होने के नाते मेरा तो यह कर्तव्य है कि वातावरण इसके अनुकूल बने. पर सहमति बनाना तो विभिन्न दलों का काम है.
 
संसद में पांच साल में 1,750 घंटे बैठकें हुईं. 423 घंटे. 25 फीसदी समय अवरोध में गया. 1,825 दिनों में से 332 दिन कार्यवाही चली जो आजादी के बाद सबसे कम है.
मैं सभी दलों के नेताओं से बात करूंगी कि इसके दिन और घंटे भी बढ़ाए जाएं.
 
अब आप राजनीति में आ गईं, कूटनीति आपके लिए अच्छी थी कि राजनीति?
कूटनीति से काफी कुछ सीखा है, जो राजनीति में लागू करेंगे.

आपको लगता है कि आरक्षण कभी इस देश से खत्म होगा?
मुझे लगता है कि जब तक जात-पात है, आरक्षण कैसे खत्म होगा?

Advertisement
Advertisement