उत्तर प्रदेश के सोनभद्र से हजारों टन सोना मिलने की बात खारिज होने के बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सरकार की खिल्ली उड़ाई है. थरूर ने कहा है कि इस सरकार को टन-टना-टन बातें कम करनी चाहिए. थरूर ने तंज कसते हुए कहा कि टन-मन-धन को लेकर ये सरकार जुनूनी हो गई है.
सोने की खबर पर गदगद थी यूपी सरकार
बता दें कि पहले-पहल जब उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हजारों टन सोना मिलने की खबर आई तो मीडिया में इसकी खूब चर्चा हुई. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इसे भगवान राम का आशीर्वाद कहा. सोनभद्र जिले के खनिज अधिकारी के.के. राय ने शुक्रवार को दावा किया था कि सोनभद्र की सोन पहाड़ी और हरदी पहाड़ी में क्रमश: 2,943.26 टन और 646.16 टन सोने का भंडार मिला है.
GSI ने खारिज किया दावा
इस खुलासे को मीडिया में जबर्दस्त कवरेज मिली. हालांकि शनिवार रात होते होते भारत भूगर्भ विज्ञान की सबसे बड़ी संस्था जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने इस दावे को खारिज कर दिया. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के निदेशक डॉ. जी.एस. तिवारी ने शनिवार को कहा कि जीएसआई ने सोनभद्र में इस तरह के भंडार का अनुमान नहीं लगाया है. उन्होंने कहा कि वहां पर 52,806.25 टन स्वर्ण अयस्क मिला है, न कि शुद्ध सोना. उन्होंने बताया कि स्वर्ण अयस्क में सिर्फ 3.03 ग्राम प्रति टन शुद्ध सोना निकल सकता है, इस पूरे अयस्क से 160 किलोग्राम सोना ही निकाला जा सकता है.
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शशि थरूर का जोरदार तंज
जीएसआई की ओर से कई टन सोना होने की खबर खारिज होने के बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सरकार पर तंज कसा है. उन्होंने ट्वीट किया, " हमारी सरकार टन-मन-धन (Tonne-mann-dhan) को लेकर इतनी जुनूनी क्यों है? पहले HM ने 5 मिलियन टन इकोनॉमी वाली बात कही. इसके बाद यूपी से 3350 टन गोल्ड रिजर्व की बात आई, जोकि बाद में मात्र 160 किलो निकली. इस सरकार को टन-टना-टन (Tonne-tana-tonne) बातें थोड़ी कम करनी चाहिए. "
Why is our government so obsessed with tonne-mann-dhan? First it was the 5 million tonne economy from the HM. Then the 3350 tonne reserve gold from UP which turned out to be merely 160 kgs. The Govt must really tone down the tonne-tana-tonne talk a bit. https://t.co/OSVhJxxg0X
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) February 23, 2020
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सोने के भंडार की खबरों को नकारते हुए जीएसआई ने कहा कि राज्य यूनिट के साथ सर्वे करने के बाद किसी धातु के मिलने की जानकारी साझा की जाती है. जीएसआई (उत्तर क्षेत्र) ने इस क्षेत्र (सोनभद्र) में 1998-99 और 1999-2000 में खुदाई की थी, वह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के डीजीएम के साथ साझा कर दी गयी थी, ताकि आगे इस पर काम किया जा सके.