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बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक के दिग्गज थे सीनियर एडवोकेट अरुण जेटली के क्लाइंट

अरुण जेटली का नाम भारत के दिग्गज वकीलों में शुमार रहा है. उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट समेत देश के विभिन्न हाईकोर्ट में कई अहम मुकदमों की पैरवी की थी. उनके क्लाइंट की सूची में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों के दिग्गज शामिल रहे.

अरुण जेटली ने कई महत्वपूर्ण केस लड़े (फाइल फोटो) अरुण जेटली ने कई महत्वपूर्ण केस लड़े (फाइल फोटो)

पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर एडवोकेट अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया. दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद जेटली ने साल 1977 में एडवोकेट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी. दिल्ली के निचली अदालत से शुरू हुई उनकी वकालत सुप्रीम कोर्ट में जाकर खत्म हुई थी. इस दौरान साल 1990 में दिल्ली हाईकोर्ट ने जेटली को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया था.

केंद्रीय कानून मंत्री रहे अरुण जेटली का नाम भारत के दिग्गज वकीलों में शुमार रहा है. उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट समेत देश के विभिन्न हाईकोर्ट में कई अहम मुकदमों की पैरवी की थी. उनके क्लाइंट की सूची में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों के दिग्गज शामिल रहे. उन्होंने कांग्रेस नेता माधवराव सिंधिया और बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी से लेकर शरद यादव तक का केस लड़ा था.

अरुण जेटली ने भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की मल्टीनेशनल कंपनियों का भी केस लड़ा. उन्होंने साल 2002 में सुप्रीम कोर्ट में पेप्सी कंपनी की तरफ से कोकाकोला कंपनी के खिलाफ पैरवी की थी. इसके बाद साल 2004 में कोकाकोला कंपनी की तरफ से राजस्थान हाईकोर्ट में पेश हुए. उन्होंने साल 2002 में उन 8 कंपनियों की तरफ से केस लड़ा, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने हिमालय में मनाली-रोहतांग रोड पर पत्थरों पर विज्ञापन रंगने पर कंपनियों को चेतावनी दी और जुर्माना लगाया था.

भारत सरकार ने जून 1998 में अरुण जेटली को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में हिस्सा लेने के लिए भेजा था. इसी सत्र में ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित कानून को मंजूरी दी गई थी. अरुण जेटली की कानून में जबरदस्त पकड़ थी. उन्होंने कानूनी मुद्दों पर कई मंचों पर ऐतिहासिक भाषण दिए. उनकी वकालत साल 1977 में दिल्ली की निचली अदालत से शुरू हुई थी और सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर साल 2009 में खत्म हुई.

उनको जनवरी 1990 में भारत का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार की पैरवी भी की थी. साल 2002 में केंद्र सरकार ने अरुण जेटली को कश्मीर मसले पर वार्ताकार नियुक्त किया था. कानूनी मामलों में शानदार समझ के चलते ही जेटली को भारतीय जनता पार्टी का कानूनी सलाहकार माना जाता था. उन्होंने कानून और करंट अफेयर्स पर कई ऐतिहासिक लेख भी लिखे. इंडो-ब्रिटिश लीगल फोरम में उन्होंने भारत में भ्रष्टाचार और अपराध पर एक पेपर भी प्रस्तुत किया था.

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