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आबादी नियंत्रण की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को नोटिस जारी किया है. भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि आबादी का विस्फोट बम से भी ज्यादा घातक है. इस बम के विस्फोट की वजह से शिक्षित, समृद्ध, स्वस्थ और सुगठित मजबूत भारत बनाने की कोशिश कभी कामयाब नहीं हो सकेगी.

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सुप्रीम कोर्ट (फोटो-एएनआई)
सुप्रीम कोर्ट (फोटो-एएनआई)

  • सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस
  • जनसंख्या नियंत्रण का मामला
  • सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी नेता की याचिका

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को नोटिस जारी किया है. भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि आबादी का विस्फोट बम से भी ज्यादा घातक है. इस बम के विस्फोट की वजह से शिक्षित, समृद्ध, स्वस्थ और सुगठित मजबूत भारत बनाने की कोशिश कभी कामयाब नहीं हो सकेगी.

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर मांग की है कि केंद्र सरकार आबादी नियंत्रण के उपायों को देश में लागू करे. उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार को सरकारी नौकरी, सब्सिडी और सहायता पाने के लिए दो बच्चों की नीति को लागू करना चाहिए.

बता दें कि पीएम मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को अपने संबोधन में बढ़ती जनसंख्या का जिक्र किया था. इससे पहले उन्होंने पीएमओ में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर प्रजेंटेशन दिया था. उन्होंने कहा कि देश को जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है. उपाध्याय ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 11 सदस्यीय संविधान समीक्षा आयोग (वेंकटचलैया आयोग) ने 2 वर्ष की मेहनत के बाद संविधान में आर्टिकल 47A जोड़ने और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था जिसे आजतक लागू नहीं किया गया है.

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बीजेपी नेता ने कहा कि अब तक 125 बार संविधान संशोधन हो चुका है, कई बार सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी बदला जा चुका है. कई नए कानून बनाये गए लेकिन देश के लिए सबसे ज्यादा जरूरी जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाया गया. अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि “हम दो-हमारे दो” कानून से देश की 50% समस्याओं का समाधान हो जाएगा.

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