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राहत इंदौरी का वो शेर जो NRC-CAA के विरोध का नारा बन गया

Rahat Indori Popular shayari During CAA-NRC Protest: राहत इंदौरी ने CAA-NRC के मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा था कि यह देश किसी व्यक्ति विशेष, पार्टी या धर्म की संपत्ति नहीं है. इसे उन्होंने शायरी के जरिए लोगों के बीच रखते हुए कहा था कि 'सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.'

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Rahat Indori dies of cardiac arrest in Indore
Rahat Indori dies of cardiac arrest in Indore

'किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है', राहत इंदौरी की ये लाइन नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और भारतीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में प्रदर्शकारियों के लिए बुलंद आवाज बनी. CAA-NRC के विरोध प्रदर्शन के दौरान राहत इंदौरी की इस शायरी ने खूब सुर्खियां बटोरी. विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के हाथों में मशहूर उर्दू शायर राहत इंदौरी के इस शेर के पोस्टर भी देखे गए.

दरअसल, सीएए-एनआरसी के मुद्दे पर राहत इंदौरी ने अपनी राय रखते हुए कहा था कि यह देश किसी व्यक्ति विशेष, पार्टी या धर्म की संपत्ति नहीं है. इसे उन्होंने शायरी के जरिए लोगों के बीच रखते हुए कहा था कि 'सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.'

'लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में
यहां पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है,
जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं, ज़ाती मकान थोड़ी है,
सभी का ख़ून है शामिल यहां की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है!

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CAA-NRC के विरोध प्रदर्शन में मशहूर हुए इस शेर पर राहत इंदौरी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा था कि लोग अपनी मांगों को उठाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. राहत इंदौरी ने कहा था कि इस शेर का ताल्लुक हर उस भारतीय नागरिक से है जो अपने हिंदुस्तान के लिए कुर्बान होने का जज्बा रखता है. उन्होंने ये भी कहा था कि मैं जहां भी जाता हूं लोग यही शायरी सुनने की फरमाइश करते हैं.

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बता दें कि मशहूर शायर राहत इंदौरी अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं. राहत इंदौरी का आज (मंगलवार) दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वे 70 वर्ष के थे. कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने के बाद वे अस्पताल में भर्ती थे. मंगलवार की सुबह ही उन्होंने ट्वीट करके कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने की सूचना दी थी. साथ ही जल्दी ठीक होने की दुआ की अपील भी की थी. राहत इंदौरी ने इंदौर के अरविंदो अस्तपाल में अंतिम सांस ली.

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