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एयरक्राफ्ट खरीद में PSU की अनदेखी से भड़के प्रफुल्ल पटेल, PM व रक्षामंत्री को लिखी चिट्ठी

वायुसेना के लिए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीद पर सरकार में ही ठन गई है. भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने रक्षा मंत्री एके एंटनी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी भेजकर इस बात से नाराजगी जाहिर की है कि एयरक्राफ्ट की टेंडर प्रक्रिया से सरकारी उपक्रमों यानी पीएसयू को क्यों अलग रखा गया.

मंत्रियों के बीच खींचतान मंत्रियों के बीच खींचतान

वायुसेना के लिए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीद पर सरकार में ही ठन गई है. भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने रक्षा मंत्री एके एंटनी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी भेजकर इस बात से नाराजगी जाहिर की है कि एयरक्राफ्ट की टेंडर प्रक्रिया से सरकारी उपक्रमों यानी पीएसयू को क्यों अलग रखा गया.

एयरफोर्स डे पर जब वायुसेना आसमान में अपनी ताकत की नुमाइश कर रही थी, रक्षामंत्री एके एंटनी को एक चिट्ठी बार-बार परेशान कर रही थी. ये चिट्ठी लिखी थी मनमोहन मंत्रिमंडल में उन्हीं के सहयोगी प्रफुल्ल पटेल ने. सख्त शब्दों में भेजी इस चिट्ठी में प्रफुल्ल पटेल ने ट्रांसपोर्ट एयर क्राफ्ट की खरीद में सरकारी कंपनियों को बोली लगाने से रोकने पर सवाल उठाए हैं.

प्रफुल्ल पटेल ने चिट्ठी में लिखा है, कई सरकारी उपक्रम ऐसे हैं, जो इस टेंडर में शामिल होने के लिए तय की गई शर्तों को पूरा करते हैं. लेकिन उन्हें इसलिए मौका नहीं दिया गया, क्योंकि वो सरकारी उपक्रम हैं. सरकारी उपक्रमों को बराबर का मौका मिलना चाहिए. इससे स्वस्थ प्रतियोगिता को बढ़ावा मिलेगा.

गौरतलब है कि प्रफुल्ल पटेल सरकारी उपक्रम का महकमा भी देखते हैं. एके एंटनी उस डिफेंस एक्वीजीशन काउंसिल के मुखिया थे, जिसने भारतीय वायुसेना में एयरक्राफ्ट की बोली से पीएसयू को बाहर रखने का फैसला किया था.

आपको बता दें कि वायुसेना अपने पुराने 56 एयरो ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की जगह करीब 12000 करोड़ में नए ट्रांसपोर्ट एयर क्राफ्ट खरीदने जा रही है. इसके लिए 9 मई को जो टेंडर जारी किया गया, उसमें हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसे सरकारी उपक्रमों की अनदेखी कर दी गई. वायुसेना का कहना है कि नए एयर क्राफ्ट भारतीय प्राइवेट सेक्टर फर्म से लिए जाएंगे. इसके लिए वायुसेना ने आठ विदेशी कंपनियों को टेंडर जारी किया है.

शर्तों के मुताबिक ये कंपनियां किसी भारतीय कंपनी को भागीदार बनाकर वायुसेना को एयरक्राफ्ट देंगी. 40 एयरक्राफ्ट भारत में निर्मित होंगे.

सवाल उठता है कि क्यों निजी और विदेशी कंपनियों को तरजीह दी जा रही है, जब सरकारी कंपनियां खुद सक्षम हैं? वैसे रक्षा सौदे को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. अगस्टा-वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद में कथित घोटाले का मामला अभी खत्म भी नहीं हुआ है. ऐसे में अच्छा होता कि सरकारी कंपनियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल होने का मौका दिया जाता. बहरहाल, प्रफुल्ल पटेल ने सवाल उछाल दिया है और अब रक्षामंत्री को इसका जवाब देना है.

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