रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने थोक उपभोक्ताओं के लिए डीजल के दाम में हाल में और एक रुपए की बढ़ोतरी के बाद फिलहाल रेल भाड़े आदि में और कोई बढ़ोतरी किए जाने से इन्कार किया है.
उन्होंने यहां एक संगोष्ठी के दौरान संवाददाताओं से अलग बातचीत में कहा ‘डीजल में एक रुपए की बढोतरी से रेलवे पर सालान 300 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा. लेकिन हम इस बढ़ोतरी के मद्देनजर माल भाड़े में संशोधन नहीं कर रहे हैं.’ बंसल ने ईंधन और बिजली के दामों में परिवर्तन के हिसाब से किराए भाड़े में संशोधन के लिए ईंधन समायोजन खंड (एफएसी) की एक नयी व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है. इसके तहत साल में दो बार भाड़े किराए की समीक्षा की जा सकेगी.
जनवरी में डीजल की कीमतों को एक तरह से नियंत्रण मुक्त किए जाने के बाद तेल कंपनियों ने रेलवे, रक्षा और राज्य सड़क परिवहन निगम जैसे थोक उपभोक्ताओं के लिए डीजल की कीमत में पहली मार्च से एक रूपए की बढ़ोतरी और कद दी थी. इससे पहले थोक ग्राहकों के लिए डीजल 10 रुपए प्रति लीटर महंगा किया गया था.
यह पूछने पर कि क्या हाल में डीजल मूल्य में ताजा वृद्धि के बाद ‘एफएसी’ व्यवस्था के तहत क्या किराए भाड़े में अब समीक्षा की जाएगी तो उन्होंने कहा , ‘ऐसा छह महीने में सिर्फ एक बार किया जा सकता है. हमने पिछले छह महीने में ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी का विश्लेषण किया है ताकि हम अगले छह महीने की योजना बना सकें. लेकिन मैं कह नहीं सकता कि आखिरी स्वरूप क्या होगा.’
रेल की वित्तीय स्थिति को ध्यान में कड़े फैसले की जरूरत के संबंध में उन्होंने कहा ‘मैं कुछ कदम उठाए हैं और इसकी आलोचना हुई. लेकिन लोकतंत्र में हमें सबको साथ लेकर चलना होता है. कई बार कड़े फैसले करने होते हैं लेकिन यह इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए कि इससे लोगों को मुश्किल हो.’ बार-बार यह पूछने पर कि क्या डीजल की कीमत में हाल में हुई बढ़ोतरी के मद्देनजर माल भाड़े में और बढ़ोतरी की गुंजाइश है, बंसल ने कहा ‘ईंधन की कीमत एक रुपए बढ़ने के कारण मैं रेल भाड़े में किसी तरह की बढ़ोतरी की संभावना से इन्कार करता हूं.’