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NRC से NPR का लिंक नहीं, पर असम में NRC की वजह से ही रुका NPR!

मोदी कैबिनेट में जो फैसला लिया गया है उसके मुताबिक, एनपीआर अपडेशन में असम को छोड़कर देश की बाकी आबादी को शामिल किया जाएगा. अमित शाह ने इससे जुड़े सवाल पर अपने जवाब में बताया है कि एनआरसी वहां बन चुकी है, वो लिस्ट अलग से बन चुकी है, अब असम में कोई एक्सरसाइज बाकी नहीं रही है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि एनआरसी का एनपीआर से कोई लेना-देना नहीं है.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

  • सरकार ने लिया NPR अपडेट करने का फैसला
  • असम छोड़कर पूरे देश में होगी NPR की प्रक्रिया
  • अमित शाह ने बताई असम को अलग रखने की वजह

नागरिकता कानून पर बवाल और मोदी सरकार की उसपर सफाई जारी है. इस बीच सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने का ऐलान कर दिया है. इस फैसले को भी एनआरसी से जोड़कर इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं. हालांकि, केंद्र सरकार साफ तौर पर दोनों के बीच किसी लिंक से इनकार कर रही है. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि NPR-NRC की प्रक्रिया का एक-दूसरे से कोई लेना-देना नहीं है और न ही इससे किसी की नागरिकता जाने वाली है. लेकिन असम में एनपीआर अपडेशन क्यों नहीं होगा, अमित शाह ने इसका कारण भी एनआरसी को ही बताया है.

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) पहली बार 2010 में तैयार किया गया था. आधार से जोड़े जाने के बाद 2015 में इसे अपडेट किया गया और अब एक बार फिर इसे अपडेट करने का फैसला किया गया है. यह फैसला मोदी कैबिनेट ने 24 दिसंबर को लिया है. बैठक में फैसले के बाद केंद्र सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि 'असम को छोड़कर देश के अन्‍य हिस्‍सों में एनपीआर के अद्यतन (अपडेशन) का काम किया जाएगा.' ऐसे में सवाल ये भी उठ रहे हैं कि असम को इससे अलग क्यों रखा गया है?

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अमित शाह ने दिया इस सवाल का जवाब

मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न्यूज एजेंसी एएनआई को इंटरव्यू दिया और एनपीआर के बारे में जानकारी दी. अमित शाह ने बताया कि NPR जनसंख्या का रजिस्टर है यानी देश में जो लोग रहते हैं ये उनका रजिस्टर है और इससे किसी की नागरिकता नहीं जाएगी.

इसके अलावा अमित शाह ने NPR और NRC का फर्क भी समझाया. अमित शाह ने बताया कि 'NPR सिर्फ जनसंख्या का रजिस्टर है, जबकि एनआरसी में लोगों से प्रूफ मांगे जाते हैं कि आप किस आधार पर देश के नागरिक हैं. इन दोनों प्रक्रिया का कोई लेना-देना नहीं है और न ही दोनों प्रक्रिया का एक-दूसरे के सर्वे में उपयोग हो सकता है.'

साथ ही अमित शाह ने यह भी कहा कि 'NPR के लिए जो प्रक्रिया अभी चलेगी उसका कभी भी उपयोग NRC के लिए नहीं हो सकता है, दोनों कानून भी अलग हैं.' अमित शाह के इस बयान के बाद उनसे असम में NPR एक्सरसाइज को लेकर भी सवाल किया गया. असम के सवाल पर अमित शाह ने अपने जवाब में बताया, 'एनआरसी वहां बन चुकी है. वो लिस्ट अलग से बन चुकी है. अब असम में कोई एक्सरसाइज बाकी नहीं रही है.'

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शाह के इस बयान से सवाल उठ रहे हैं कि अगर एनआरसी और एनपीआर अलग-अलग हैं तो असम को एनपीआर से अलग रखने के पीछे एनआरसी का हवाला क्यों दिया जा रहा है? अगर एनआरसी, एनपीआर से बिल्कुल अलग प्रक्रिया है तो क्यों नहीं असम को भी इसमें शामिल किया गया क्योंकि वहां एनआरसी हुई है, एनपीआर की 'अलग प्रक्रिया' नहीं हुई?  विपक्ष कह रहा है कि एनपीआर दरअसल एनआरसी का ही पहला कदम है. असम में एनआरसी के चलते एनपीआर न होना उसके तर्क में वजन भर रहा है. खुद अमित शाह भी कह रहे हैं कि  'एनआरसी वहां बन चुकी है. अब असम में कोई एक्सरसाइज बाकी नहीं रही है.'

ये सवाल जब आजतक के शो 'दंगल' में बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि असम में एनआरसी की प्रक्रिया चालू है. वो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है. उस प्रक्रिया में कोई दखल आए ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि ये सर्वोच्च न्यायालय की इजाजत से ही संभव होगा. इसीलिए एनपीआर से असम को बाहर रखा गया है.

क्या NPR-NRC का कोई लेना-देना नहीं है?

अमित शाह ने अपने इंटरव्यू में साफ तौर पर बार-बार जोर देकर कहा है कि ये दोनों एक्सरसाइज अलग हैं और NPR-NRC में कोई संबंध ही नहीं है. जबकि असदुद्दीन ओवैसी कह रहे हैं कि NPR, NRC की प्रक्रिया का ही हिस्सा है. दोनों नेता एक-दूसरे के बयान को गलत ठहरा रहे हैं. अमित शाह ने यह बयान 24 दिसंबर, 2019 की शाम दिया है जबकि असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह को केंद्रीय गृह मंत्रालय का ही 2014 का एक बयान याद दिलाते हुए उन्हें पढ़ने की नसीहत दी है.

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ओवैसी ने 26 नवंबर, 2014 को आए गृह मंत्रालय के बयान का हवाला देते हुए कहा कि एनआरसी और एनपीआर में संबंध है. ओवैसी ने कहा है कि, 'गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) में संबंध है. अमित शाह कह रहे हैं कि दोनों में कोई संबंध नहीं है. पहले उन्हें अपने मंत्रालय की रिपोर्ट पढ़ लेनी चाहिए.' इससे जुड़ी एक प्रेस रिलीज भी उन्होंने शेयर की है.

यानी नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर जहां भ्रम की स्थिति अब तक बनी हुई है, वहीं अब NRC से NPR कनेक्शन की बहस भी छिड़ गई है. अमित शाह ने संसद में दिए अपने बयानों में जहां NRC देशभर में लागू करने की बात कही थी, तो दिल्ली के रामलीला मैदान में 22 दिसंबर को रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि एनआरसी पर कहीं कोई चर्चा ही नहीं हुई है. विपक्ष ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इन बयानों को आधार बनाते हुए निशाने पर लिया था तो अब NRC-NPR के एक-दूसरे से जुड़े होने पर गृह मंत्री अमित शाह के मौजूदा बयान और 2014 के गृह मंत्रालय के आधिकारिक बयान को आधार बनाकर विपक्षी नेता सवाल खड़े कर रहे हैं.

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