जल नीति बनाने वाला मेघालय देश का पहला राज्य बन गया है. राज्य के उप मुख्यमंत्री प्रिस्टोन तिनसॉन्ग ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा, इस नीति का मकसद सामुदायिक भागीदारी के साथ-साथ सतत विकास और जल संसाधनों का इस्तेमाल करना है. नदी प्रदूषण और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण जैसे मुद्दों को भी इसमें रेखांकित किया गया है. यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है, जब देश के कई हिस्से बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं. शुक्रवार को मेघालय कैबिनेट ने इस ड्राफ्ट पॉलिसी को मंजूरी दी थी.
उपमुख्यमंत्री प्रिस्टोन तिनसॉन्ग ने कहा कि इस नीति से स्वास्थ्य और आजीविका में सुधार होगा और लोगों में भेदभाव नहीं होगा. यह एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता के जरिए वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुशासन भी सुनिश्चित करेगा."
उन्होंने आगे कहा, 'इस नीति में जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण और नदी प्रदूषण जैसे मुद्दों को भी रेखांकित किया गया है. हम सामुदायिक भागीदारी हासिल करना चाह रहे हैं ताकि इस नीति के जरिए गांवों तक भी पहुंचा जा सके.' तिनसॉन्ग ने कहा, गांव के स्तर पर समितियां बनाई जाएंगी और ग्राउंड वाटर के मुद्दे से इस नीति के जरिए निपटा जाएगा. इसके अलावा विभाग भी पानी की गुणवत्ता को चेक करेगा कि क्या उसमें ज्यादा लोहे के कण हैं या फिर पानी एसिडिक है. सरकार जल्द ही पॉलिसी को नोटिफाई करेगी.