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महाराष्ट्रः शरद पवार ने खेला दांव, बहन-भाई और चाचा-भतीजे के बीच होगी लड़ाई!

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(एनसीपी) के मुखिया शरद पवार ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. दो सीटों पर परिवार के सदस्यों के बीच लड़ाई की नौबत है.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(एनसीपी) मुखिया शरद पवार. (फाइल फोटो-पीटीआई) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(एनसीपी) मुखिया शरद पवार. (फाइल फोटो-पीटीआई)

  • महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनसीपी ने घोषित किए टिकट
  • परली और बीड सीट पर परिवार के सदस्यों के बीच हो सकती है लड़ाई

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट घोषित करने में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(एनसीपी) ने बाजी मार ली है. एनसीपी मुखिया शरद पवार ने खास रणनीति के तहत  टिकट बांटा है. दो सीटों पर तो राज्य के दो राजनीतिक परिवारों के सदस्यों के बीच ही लड़ाई होने की नौबत आ गई है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने  पांच टिकट घोषित किए हैं. धनंजय मुंडे (परली), संदीप क्षीरसागर (बीड), विजय सिंह पंडित (गेवराई), प्रकाश सोलंकी (माजलगांव) और नमिता मूंदड़ा (काईज) को उम्मीदवार घोषित किया गया है.

परिवार के सदस्यों के बीच लड़ाई

महाराष्ट्र की परली विधानसभा सीट से शरद पवार ने बीजेपी नेता रहे स्व. गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय मुंडे को फिर से उतारा है. इस सीट  पर 2014 के चुनाव में धनंजय को चचेरी बहन पंकजा मुंडे से 25,895 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. इस बार भी चचेरे भाई-बहन के बीच मुकाबला हो सकता है. इसी तरह बीड सीट पर एनसीपी से शरद पवार ने शिवसेना नेता और देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री जयदत्त क्षीरसागर के भतीजे संदीप को चुनाव मैदान में उतारा है. पहले जयदत्त भी एनसीपी में ही थे. मगर बाद में शिवसेना में शामिल होने के बाद राज्य सरकार में मंत्री बन गए. इस सीट पर चाचा और भतीजे के बीच लड़ाई होने की संभावना है.

कांग्रेस-एनसीपी के बीच समझौता

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी के बीच गठबंधन की सीटों का बंटवारा हो चुका है. दोनों दलों ने 125-125 सीटों पर लड़ने की तैयारी की है. वहीं 38 सीटें सहयोगी दलों के खाते में है. 2014 के चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी को क्रमश: 42 और 41 सीटें मिलीं थीं. वहीं बीजेपी और शिवसेना को क्रमशः 122 और 63 सीटें मिलीं थीं. 2014 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन टूटने के कारण शिवसेना और बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. बाद में फिर से गठबंधन कर बीजेपी और शिवसेना ने राज्य में सरकार बनाई थी.

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