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लश्कर के नए मॉड्यूल के जरिए नेपाल में चल रहा है भारत विरोधी एजेंडा

बता दें कि पिछले तीन दशक में दर्जनों खतरनाक आतंकी भारत-नेपाल सीमा पर दबोचे जा चुके हैं. सुरक्षा एजेंसियां अपनी हर रिपोर्ट में भारत-नेपाल सीमा को अति संवेदनशील बता चुके हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो

नेपाल के जरिए आतंकी घुसपैठ और आतंकी मॉड्यूल को पालने का काम पाकिस्तान खुफिया एजेंसी लगातार करती रहती है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, नेपाल के मोरंग जिले में लश्कर-ए-तैयबा का संदिग्ध मौलाना उमर मदनी नया मॉड्यूल बनाकर भारत विरोधी गतिविधियों को फैलाने में लगा है.

खुफिया सूत्रों ने 'आजतक' को जानकारी दी है कि मौलाना मदनी जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है वो नेपाल एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के जरिए भारत विरोधी गतिविधियों को धड़ल्ले से फैला रहा है. खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट जो केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी है उसमें कहा है कि भारत नेपाल के बॉर्डर से सटे कुछ नेपाल के जिलों में मौलाना मदनी अपने एनजीओ के जरिए विदेशों से फंड मंगा रहा है. इस फंड का इस्तेमाल मदनी बॉर्डर एरिया के भोले-भाले युवाओं को लश्कर में शामिल करने के लिए ब्रेनवॉश कर रहा है.

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खुफिया एजेंसियों ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि कैसे नेपाल रूट से विदेशो का पैसा नेपाल के एनजीओ में आ रहा है. इस एनजीओ का इस्तेमाल मदनी मुस्लिम युवाओं को लश्कर में शामिल करने के लिए रेडिक्लाईज कर रहा है.

आतंकवाद को आश्रय देने वाले पाकिस्तान के लिए 1751 किमी में खुली भारत- नेपाल की सीमा सबसे मुफ़ीद रही है. यही वजह है कि खूंखार आतंकी बाघा या अन्य बॉर्डर की बजाय इस रूट को ज्यादा तरजीह देते है. क्योंकि ये बॉर्डर खुला है हालांकि की एसएसबी इस बॉर्डर की सुरक्षा में रहती है. लेकिन आतंकी कई बार घुसने की कोशिश में पकड़े जाते हैं.

भारत का मित्र देश नेपाल आतंकियों के लिए मुफीद साबित हो रहा. इस बात की तस्दीक 1991 में हुई जब सोनौली बॉर्डर पर पंजाब का उग्रवादी सुखविंदर सिंह दबोचा गया था. सिद्धार्थनगर के बढ़नी में भारत-नेपाल सीमा पर अजमेर सिंह व भाग सिंह नामक उग्रवादी पकडे गए थे. 1993 में मुंबई कांड का आरोपी टाइगर मेमन भी सोनौली बॉर्डर पर ही दबोचा गया. इनके अलावा नेपाल से अपनी गतिविधियां संचालित करने वाले पाकिस्तानी आतंकी जब्बार को एटीएस ने लखनऊ में पकड़ा था. जब्बार भी नेपाल सीमा के रास्ते ही भारत के घुसा था लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ गया था.

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यही नहीं बब्बर खालसा का खतरनाक उग्रवादी मक्कन सिंह बढ़नी (सिद्दार्थनगर) में पकड़ा गया था. भारत-नेपाल सीमा पर ही देश के लिए खतरा बने टॉप आतंकियों में शुमार अब्दुल करीम टुंडा को दिल्ली पुलिस ने दबोचने में कामयाबी हासिल की थी. फिर इंडियन मुजाहिद्दीन का खूंखार आतंकी यासीन भटकल नेपाल की सीमा पर पकड़ा गया. अक्टूबर 2016 में डॉ-जावेद नाम का एक संदिग्ध पाक नेशनल पकड़ा गया था. बीते 13 मई 2017 को हिजबुल आतंकी नासीर अहमद वानी को सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया गया था.

सुरक्षा एजेंसियों की माने तो नेपाल में पाक ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई ने काफी जाल बिछा रखा है. इस पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने ही भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित करने के लिए एक बार फिर लश्कर के मॉड्यूल को सह देकर मुस्लिम युवाओं को रेडिक्लाईज करने की कोशिश में जुटा है. हालांकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और ख़ुफिया एजेंसी लश्कर के इस संदिग्ध मॉड्यूल को लेकर अलर्ट पर हैं.

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