डॉक्टर मुखर्जी को संविधान के अनुच्छेद 370 के घोर विरोधी के तौर पर जाना जाता था. डॉक्टर मुखर्जी इस अनुच्छेद को राष्ट्रीय एकता के लिए ख़तरा मानते थे. सोमवार को मोदी सरकार ने संविधान के इस विवादित अनुच्छेद को हटाने का एलान किया. डॉक्टर मुखर्जी के परिवार ने कोलकाता में मोदी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है.
डॉक्टर मुखर्जी के 90 वर्षीय भतीजे जस्टिस (रिटायर्ड) चित्तातोष मुखर्जी ने केंद्र सरकार के फैसले पर आशावादी, लेकिन सतर्क प्रतिक्रिया व्यक्त की. जस्टिस मुखर्जी ने आज तक से कहा, “मैं खुश हूं कि जिसके लिए मेरे अंकल लड़े और जान दी, वो अब पूरा हो गया है. एक कानून और एक प्रशासन के साथ ऐसे कानून को लागू करने में एकमतता होनी चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “ऐसा कदम उठाने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए, लेकिन क्या ये बुद्धिमत्ता वाला फैसला है, यह लोगों और सुप्रीम कोर्ट को तय करना है.”
यह पूछे जाने पर कि क्या जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देना ऐतिहासिक भूल थी जैसा कई लोग कहते हैं, प्रख्यात न्यायविद ने कहा, “इस वक्त अनुच्छेद 370 को हटाया (ये कहते हुए कि ये एक अस्थायी प्रावधान था) गया. मैं कहना चाहूंगा कि बीजेपी ने बीते आम चुनाव में ऐसा करने का वादा किया था, उन्होंने कम से कम इसे ठोस रूप देने का साहस दिखाया.”
जवाहर लाल नेहरू से डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के समीकरण को लेकर जस्टिस मुखर्जी का मानना है कि उनके मतभेद वैचारिक थे. डॉक्टर मुखर्जी ने कहा, “इनके बीच कोई मतभेद निजी नहीं था, उन्होंने एक मुद्दे पर इस्तीफा दिया और चुनाव लड़ा. ये संसद में लगभग एक शख्स का विरोध जैसा था.”
बता दें कि डॉक्टर मुखर्जी ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू किए जाने के विरोध में नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. भाजपा का काफी पुराने समय से नारा भी रहा है- 'जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है.'