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आईएसआई की अलकायदा से मिलीभगत नहीं: पाक

देश में दुनिया के सबसे वांछित आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को शरण देने में गुप्तचर एजेंसियों की संभावित रूप से हाथ होने को लेकर वैश्विक शंका का सामना करने वाले पाकिस्तान ने कहा कि आईएसआई या उसकी सरकार में किसी तत्व की अलकायदा के साथ मिलीभगत नहीं है.

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देश में दुनिया के सबसे वांछित आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को शरण देने में गुप्तचर एजेंसियों की संभावित रूप से हाथ होने को लेकर वैश्विक शंका का सामना करने वाले पाकिस्तान ने कहा कि आईएसआई या उसकी सरकार में किसी तत्व की अलकायदा के साथ मिलीभगत नहीं है.

पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर ने ओसामा के एबटाबाद में पाकिस्तान सैन्य अकादमी से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक परिसर में रहने के बावजूद उसका पता लगाने में विफल रहने को लेकर लग रहे आरोपों से आईएसआई का जोरदार ढंग से बचाव किया.

उन्होंने एबटाबाद में अमेरिकी कमांडो कार्रवाई में ओसामा के मारे जाने के बाद पाकिस्तान के पहले वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आयोजित पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘यह कहना आसान है कि आईएसआई या सरकार में स्थित तत्वों की अलकायदा के साथ मिलीभगत है. यह गलत परिकल्पना और गलत आरोप है. यह किसी भी आधार पर मान्य नहीं है और पाकिस्तान और आईएसआई ने जो कार्य सिद्ध किये हैं उसके मद्देनजर यह आरोप कहीं भी नहीं टिकते.’

बशीर ने इस धारणा को भी समाप्त करने के प्रयास किये कि पाकिस्तान में अमेरिका की इस कार्रवाई से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुंचे चुके हैं.

उन्होंने यह स्वीकार किया कि एकतरफा और गुप्त कार्रवाई ओसामा का खात्मा करने में सफल रही है लेकिन सौभाग्य की बात रही कि ऐसा बड़ा हादसा टल गया जो हो सकता है क्योंकि एबटाबाद में हेलीकॉप्टरों की मौजूदगी की सूचना पर पाकिस्तानी वायुसेना ने दो एफ-16 जेट विमानों को कार्रवाई के लिए बुला लिया था.

उन्होंने कहा, ‘यदि कुछ गलत हो जाता कि इससे भयानक तबाही हो सकती थी.’ उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों को नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तथा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के साथ पाकिस्तान का सहयोग कुछ मानदंड पर आधारित हैं जिसका सम्मान होना चाहिए.

बशीर ने सीआईए प्रमुख लियोन पनेटा की ओर से ओसामा को शरण देने में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों अथवा गुप्तचर एजेंसियों के संभावित रूप से मिलीभगत के बारे में की गई टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणी समय समय पर आती रहती हैं जिसका उद्देश्य आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में पाकिस्तान से और सहयोग बढ़ाना है.

उन्होंने दावा किया कि अलकायदा और तालिबान के लड़ाकों को पकड़ने अथवा मारने में आईएसआई सीआईए से भी अधिक सफल रहा है. उन्होंने कहा कि आईएसआई ने वर्ष 2009 से ही उस परिसर के बारे में जानकारी साझा की तथा उसने वर्ष 2004 से ही एबटाबाद पर अपना ध्यान केंद्रित किया हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तानी सुरक्षा बल देश की रक्षा करने के कार्य के प्रति न तो अक्षम है न ही लापरवाह है. उन्होंने कहा कि यदि वह गुप्तचर असफलता थी तो वह वैश्विक खुफिया असफलता भी थी.’

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