पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संरक्षण का लाभ उठा रहे भारतीय संदिग्ध आतंकी अब देश में हमले के लिये दबाव में हैं. सरकारी सूत्रों ने बताया कि कई साल से जिन आंतकवादियों को संरक्षण दिया जा रहा था उनसे अब कहा गया है कि वह हमले करें अथवा परिणाम भुगतने को तैयार रहें.
राष्ट्रीय राजधानी तथा हिमाचल प्रदेश में विस्फोट की कथित योजना बना रहे सिख उग्रवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के गिरफ्तार सदस्यों से पूछताछ के दौरान इसका खुलासा हुआ है. सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान स्थित वाधवा सिंह और परमिन्दर सिंह इन सदस्यों को निर्देश देते थे.
बाधवा और परमिन्दर का नाम पाकिस्तान को हाल में सौंपे गये वांछित आतंकवादियों के डोजियर में है. एक सूत्र ने बताया कि इन लोगों को काफी समय से संरक्षण दिया जाता रहा है. अब उन्हें अपनी वफादारी दिखाने को कहा गया है. सूत्रों के अनुसार देश पर हमले के लिये कुछ लोग संगठित होने का प्रयास कर रहे हैं.
चूंकि इस साल राष्ट्रमंडल खेल होने हैं आईएसआई हमले के लिये दवाब बनाने के लिये आंतकवादी गुटों को हरसंभव मदद दे रहा है लेकिन देशभर में विभिन्न गुटों के भंडाफोड़ से उनके इरादे पस्त हुए हैं. उन्होंने बताया कि राष्ट्रमंडल से पहले देश में हमले कर उसे अस्थिर जताने की कोशिश की जा रही है. रणनीति यह है कि देश के बाहर के संगठनों की बजाय यहां स्थित संगठन इसे अंजाम दें.
इस परिप्रेक्ष्य में उल्लेखनीय है कि बुधवार को लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमाण्डर अब्दुल वाहिद कश्मीरी तथा हिज्जुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाउद्दीन सहित सैकड़ों सशस्त्र उग्रवादी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कोटली कस्बे में एकत्रित हुए और उन्होंने भारत के खिलाफ ‘जेहाद’ छेड़ने का संकल्प लिया.