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यूलिप के लिए इरडा जारी करेगा नए दिशानिर्देश

यूनिट निवेश से जुड़ी बीमा योजनाओं (यूलिप) के विनियमन के अधिकार को लेकर शेयर बाजार नियामक सेबी से रस्साकशी में कामयाबी के बाद बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने कहा है कि वह बीमा और निवेश पर आधारित इन मिली जुली योजनाओं को निवेशकों के लिये अधिक आकषर्क बनाने के उद्येश्य से नये दिशानिर्देश तैयार करेगा.

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यूनिट निवेश से जुड़ी बीमा योजनाओं (यूलिप) के विनियमन के अधिकार को लेकर शेयर बाजार नियामक सेबी से रस्साकशी में कामयाबी के बाद बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने कहा है कि वह बीमा और निवेश पर आधारित इन मिली जुली योजनाओं को निवेशकों के लिये अधिक आकषर्क बनाने के उद्येश्य से नये दिशानिर्देश तैयार करेगा.

इरडा अध्यक्ष जे. हरिनारायण से जब यह पूछा गया कि क्या बीमा नियामक यूलिप उत्पादों को आकषर्क बनाने के लिये नये इरडा की ओर से नए दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जबाव में उन्होंने पेट्र को बताया ‘‘हां, निश्चित रुप से.’’

यूलिप पर नियंत्रण को लेकर इरडा का पूंजी बाजार नियामक ‘भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)’ से विवाद हो गया था. सेबी ने यूलिप के प्रीमियम का निवेश शेयरों में लगाए जाने के आधार पर इसके नियमन को अपने नियंत्रण में करने के लिये निजी कंपनियों को इन योजनाओं का अपने पास पंजीकरण कराने का नोटिस जारी किया था.{mospagebreak}बहरहाल, राष्ट्रपति ने शुक्रवार रात एक अध्यादेश जारी कर यह सुनिश्चित किया कि यूलिप उत्पादों का विनियमन इरडा के अधिकार क्षेत्र में ही रहेगा. अध्यादेश में कहा गया है कि जीवन बीमा कारोबार में यूलिप जैसी योजनाएं और उससे जैसे अन्य उत्पाद शामिल होंगे.

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सरकार ने इसके साथ ही बीमा और निवेश वाले मिश्रित उत्पादों के क्षेत्राधिकार तय करने के लिये वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में एक समिति भी बनायी है. समिति में वित्त सचिव, वित्तीय सेवा सचिव और रिजर्व बैंक आफ इंडिया, इरडा, सेबी तथा पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण प्रमुखों को शामिल किया गया है.

यूलिप मामले पर सेबी और इरडा के बीच विवाद की शुरुआत तब हुई जब दो महीने पहले 9 अप्रैल को सेबी ने अचानक कदम उठाते हुये जीवन बीमा क्षेत्र की 14 कंपनियों को नये यूलिप उत्पाद जारी करने से रोक दिया था. इरडा को सेबी का यह आदेश उसके अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण लगा और उसने कंपनियों से इस आदेश को नहीं मानने के लिये तुरंत आदेश दिया. मामला वित्त मंत्रालय पहुंचा लेकिन मंत्रालय ने इसका निपटारा करने के बजाय उन्हें न्यायालय की सलाह लेने का कहा.

निजी क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनियों के कारोबार में यूलिप उत्पादों का 50 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा है. यूलिप उत्पादों पर एकत्रित की गई राशि में बीमा कवर दिये जाने के साथ साथ इक्विटी बाजार में निवेश किया जाता है.

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