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एयर स्ट्राइक के बाद राहुल ने कांग्रेस के 'बयान बहादुरों' को किया टाइट

राजनीतिक विरोध कितने भी क्यों ना हो लेकिन जब देश या देश की सेना को कोई चुनौती दे तो उसे सबक़ सिखाने के लिए हर कोई एकजुट है. 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद यूपी में चुनावी यात्रा पर निकले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फौरन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार का समर्थन करते हुए सेना को शाबाशी दी थी लेकिन उसके बाद कांग्रेस नेता संजय निरुपम और कुछ नेताओं ने सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत मांग डाले.

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी( फाइल फोटो)
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी( फाइल फोटो)

राजनीतिक विरोध कितने भी क्यों ना हो लेकिन जब देश या देश की सेना को कोई चुनौती दे तो उसे सबक़ सिखाने के लिए हर कोई एकजुट है. 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद यूपी में चुनावी यात्रा पर निकले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फौरन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार का समर्थन करते हुए सेना को शाबाशी दी थी लेकिन उसके बाद कांग्रेस नेता संजय निरुपम और कुछ नेताओं ने सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत मांग डाले.

खुद राहुल ने ‘खून की दलाली” वाला बयान दिया. जिसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो आया तो पार्टी को खासी किरकिरी का सामना करना पड़ा. ऐसे में इस बार जब पुलवामा हमला हुआ तो राहुल ने मीडिया से मुखातिब होकर कहा कि, वो इस वक़्त सरकार के साथ खड़े हैं. साथ ही पार्टी नेताओं को भी करीब एक हफ्ते तक बयानबाज़ी से रोक दिया. खुद राहुल और प्रियंका गांधी शहीदों के परिजनों से मिलने भी गए तो भी खास ख्याल रखा कि, कोई राजनैतिक बयानबाज़ी ना हो.

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कुछ यूं ही जब अब भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक की तो नेताओं में सबसे पहले करीब साढ़े नौ बजे राहुल ने ट्वीट किया और भारतीय वायुसेना के पायलटों को सलाम किया. इसके बाद राहुल ने मीडिया विभाग को साफ निर्देश दिया कि, सिवाय वायुसेना के पायलटों को बधाई देने के कोई भी मीडिया या ट्विटर पर बयानबाज़ी नहीं करेगा. यही वजह रही कि, किसी कांग्रेसी ने ट्विटर पर या मीडिया में कोई बयान नहीं दिया. पार्टी की तरफ से सिर्फ पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी को आधिकारिक तौर पर बयान देने को कहा गया.

पूर्व रक्षा मंत्री ने भी नपे तुले शब्दों में भारतीय वायुसेना को बधाई दी और पाकिस्तान को बाज आने को कहा. इतना ही नहीं राहुल के मीडिया विभाग को ये भी सीधे निर्देश दिए कि, मणिशंकर अय्यर जैसे जो नेता अमूमन बयानबाज़ी के लिए जाने जाते हैं, उनको व्यक्तिगत तौर पर उनका सन्देश दे दिया जाए. मीडिया विभाग ने ऐसा किया भी, जिसके बाद पार्टी के ‘बयान बहादुर’ खामोश रहे.

कुल मिलाकर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मसले पर एक बार पार्टी की किरकिरी देख चुके राहुल अब खासे सतर्क हैं और ऐसा कोई मौका नहीं देना चाहते जिससे कांग्रेस को विषम स्थिति का सामना करना पड़े.

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