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सरकार को आदर्श नियोक्ता की तरह आचरण करना चाहिएः SC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को एक आदर्श नियोक्ता की तरह आचरण करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियुक्ति और तरक्की के मामले में उसके कर्मचारियों के साथ निष्पक्षता बरती जाये.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को एक आदर्श नियोक्ता की तरह आचरण करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियुक्ति और तरक्की के मामले में उसके कर्मचारियों के साथ निष्पक्षता बरती जाये.

न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने कहा है कि सुशासन की अवधारणा उसी समय अधिक मजबूत होगी जब सरकारी कर्मचारियों को यह भरोसा हो कि उनके साथ निष्पक्षता बरती जायेगी और उनके विश्वास को ठेस नहीं पहुंचायी जायेगी.

न्यायाधीशों ने असम में कर्मचारियों की नियुक्ति और तरक्की के मामले में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करने के लिए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया.

न्यायाधीशों ने कहा कि अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि सरकार एक आदर्श नियोक्ता है और इसलिए उससे अपेक्षा की जाती है कि वह अपने नियमों का सम्मान करते हुए ठीक तरह से काम करे.

न्यायालय ने कहा कि हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि कर्मचारियों की वाजिब आकांक्षाएं विलोपित नहीं हों और ऐसी स्थिति नहीं उत्पन्न होनी चाहिए जिसमें उनकी उम्मीद निराशा में बदल जाये.

प्रत्येक व्यक्ति के लिए उम्मीद बेशकीमती होती है और आदर्श नियोक्ता को उनकी (कर्मचारियों) की वरिष्ठता के मामले में शतरंज का खेल खेलकर उनकी उम्मीदों को कपटी और विश्वासघात जैसी धारणाओं में तब्दील नहीं करना चाहिए.

न्यायाधीशों ने कहा कि राज्य सरकार ने विशेष भर्ती बैच के तहत नियुक्ति के मामले में नियमों का उल्लंघन किया. इस दौरान 1993-94 में असम पुलिस सेवा में कार्यरत अधिकारियों को तरक्की दी गयी थी.

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