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18,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंचा सोना

शादी-ब्याह का मौसम सोने के कारोबारियों के लिए सबसे बढ़िया समझा जाता है पर इस समय सोना 18,000 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर के आसपास पहुंच चुका है, जिससे इस साल शादी के सीजन में भी सोने की मांग ठंडी नजर आ रही है.

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शादी-ब्याह का मौसम सोने के कारोबारियों के लिए सबसे बढ़िया समझा जाता है पर इस समय सोना 18,000 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर के आसपास पहुंच चुका है, जिससे इस साल शादी के सीजन में भी सोने की मांग ठंडी नजर आ रही है.

राजधानी के आभूषण विक्रेताओं का कहना है कि सोने की बिक्री में 25 प्रतिशत की गिरावट आई है. हालांकि, जिनके घर पर शादी है वे सोने के जेवरात के शोरूम तक तो पहुंच रहे हैं, लेकिन अपनी खरीदारी को सीमित रख रहे हैं. आभूषण विक्रेताओं का कहना है कि उंची कीमतों की वजह से विवाह के लिए सोने की मांग में काफी कमी आई है और इसमें करीबन 25 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है.

शादी-विवाह का मौसम नवंबर मध्य से शुरू होकर फरवरी तक चलता है. इस दौरान अकेले राजधानी में ही 25,000 शादियां होने का अनुमान है.

सोने की कीमतों में हाल में आई तेजी के बारे में सार्वजनिक क्षेत्र की एमएमटीसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हालांकि, जेवरात की खरीद काफी कम है, लेकिन सोने के सिक्के और छड़ की खरीद में सकारात्मक रुख दिखाई दे रहा है. लोग निवेश की दृष्टि से सोना खरीद रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इसकी कीमतों में आगे और तेजी आ सकती है.’’ चांदनी चौक तथा करोल बाग के प्रमुख सोना कारोबारियों का कहना है कि इस बार उनके पास सस्ते हार, अंगूठी, कान की बालियां तथा चूड़ियों के आर्डर मिल रहे हैं.

मलिक ज्वेलर्स प्राइवेट लि. के नितिन मलिक कहते हैं, ‘‘पिछले साल तक लोग दुलहन के लिए 10 से 15 तोला (100 से 150 ग्राम) तक सोना खरीदते थे लेकिन इस बार वे हिसाब से खरीद कर रहे हैं.’’ चांदनी चौक के एक आभूषण विक्रेता अतुल जैन ने कहा, ‘‘सोने की बिक्री में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आई है, लोग अब सिर्फ दूल्हा-दुलहन के लिए सोना खरीद रहे हैं. पिछले साल तक जो सोने की अंगूठी 5,000 रुपये में बन जाती थी, वह इस साल 9,000 रुपये में आ रही है.’’ सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से भी खरीदार बाजार से दूर हैं, क्योंकि वे यह फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि सोने की खरीद का यह सही समय है कि या नहीं. जैन ने कहा कि जिन परिवारों में शादी है, वे सिर्फ दूल्हा-दुलहन के लिए सोना खरीद रहे हैं. बाकी लोग पुराने जेवरों पर सिर्फ पालिश करवा रहे हैं.

तनिश्क के एक आउटलेट के प्रबंधक कहते हैं कि 2004 के बाद से कीमतों में आ रही तेजी के कारण सोने के कम इस्तेमाल का चलन बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि हम अपने ग्राहकों का कम सोने वाला बड़ा पीस दिखाकर संतुष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं. कनाट प्लेस में फुलकारी के बिक्री प्रबंधक ए के छाबड़ा ने कहा कि बेशक लोग जेवरात कम खरीद रहे हैं, लेकिन वे सोने के सिक्कों तथा छड़ में निवेश कर रहे हैं.

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