चुनाव आयोग ने बुधवार को चुनाव कार्य के लिये वाहनों के अधिग्रहण पर गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष मौखिक माफी मांगी. मुख्य न्यायाधीश भास्कर भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति जे बी पर्दीवाला की खंडपीठ ने आयोग द्वारा वाहनों के अधिग्रहण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया.
अशोक मुनीश्वर गिरी ने जनहित याचिका दायर कर दावा किया था कि चुनाव कार्यों के लिये अधिकारी ‘अन्यायपूर्ण तरीके’ से वाहनों का अधिग्रहण कर रहे हैं. जनहित याचिका में वाहनों के प्रयोग के लिये दिये जाने वाले हर्जाने का लेकर भी नाखुशी जाहिर की गयी है.
मुनीश्वर गिरी के वकील हषिर्ल ढोलकिया ने कहा कि लोगों से मौके पर ही वाहन खाली करने के लिये कहा जाता था जिससे बहुत असुविधा होती थी. साथ ही आयोग द्वारा दिया जाने वाला हर्जाना भी अनुचित था.
मंगलवार को आयोग के वकील ने वाहन मालिकों को हुयी असुविधा के लिये मौखिक माफी प्रस्तुत की और अदालत से हर्जाना भुगतान पर निर्देश मांगे. राज्य सरकार ने भी कहा कि उसने नयी दरों से हर्जाना भुगतान के लिये प्रस्ताव जारी किया है.